
देहरादून: उत्तराखंड में हर साल मानसून सीजन के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा जैसी स्थिति और मैदानी जिलों में बाढ़ के हालात बनते हैं। खासकर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में बाढ़ के कारण फसलों और जनजीवन को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून से पहले बाढ़ से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
शुक्रवार, 30 जनवरी को सचिवालय में सिंचाई परियोजनाओं के तहत रिवर प्रोटेक्शन और डीसिल्टिंग कार्यों की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बीते वर्षों के अनुभवों का जिक्र करते हुए यह बात सामने आई कि समय पर तैयारियां न होने के कारण कई इलाकों में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मानसून सीजन के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि नदियों के किनारे सुरक्षा कार्य, गाद निकासी और जल संरक्षण से जुड़े सभी प्रोजेक्ट तय समयसीमा में पूरे हों।
आंकड़े और तथ्य
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि लघु सिंचाई विभाग की ओर से जल संरक्षण और संवर्द्धन योजनाओं के तहत राज्य में अब तक 708 चेक डैम बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा उधमसिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार जिलों में 419 रिचार्ज शॉफ्ट स्थापित किए गए हैं, जिनसे हर साल करीब 108.94 करोड़ लीटर भूजल रिचार्ज होने की संभावना है।
अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि 9 वन प्रभागों में 14 जल स्रोतों के उपचार का कार्य किया जा रहा है। वहीं कैंपा योजना के तहत विभिन्न वन प्रभागों में 247 जल धाराओं का उपचार जारी है।
वनाग्नि रोकथाम पर निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने वन विभाग को वनाग्नि की रोकथाम के लिए अभी से पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन के साथ-साथ आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। वन पंचायतों और आसपास के ग्रामीणों के साथ समन्वय बनाकर काम किया जाए और फायर लाइन की समय पर सफाई की जाए। साथ ही वनभूमि पर अतिक्रमण हटाने को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए।
आगे क्या होगा
सरकार का दावा है कि मानसून से पहले सभी संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण से जुड़े कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। अधिकारियों को नियमित निगरानी और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।




