नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण से जुड़े 18 दिसंबर 2025 के आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई अप्रैल माह में नियत की है। यह आदेश उन प्रवक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने वेतन नियमावली में भूतलक्षी संशोधन को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड को 2016 की वेतन नियमावली के तहत चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान देते समय एक इंक्रीमेंट देय था। बाद में राज्य सरकार ने सरकारी सेवक वेतन नियमावली प्रथम संशोधन 2025 का प्रख्यापन करते हुए इसे 1 जनवरी 2016 से भूतलक्षी प्रभाव के साथ लागू किया और चयन/प्रोन्नत वेतनमान के समय मिलने वाला इंक्रीमेंट समाप्त कर दिया। इसी के आधार पर वित्त सचिव ने 18 दिसंबर 2025 को पुनर्निर्धारण का आदेश जारी किया।
आधिकारिक जानकारी
मामले की सुनवाई उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ में हुई, जिसमें रवींद्र मैठानी और आलोक मेहरा शामिल रहे। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद 18 दिसंबर 2025 के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
याचिका सुशील तिवारी, धीरेंद्र मिश्रा, विनोद पैन्यूली और शंकर बोरा सहित 400 से अधिक प्रवक्ताओं की ओर से दायर की गई। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान के समय देय एक इंक्रीमेंट को भूतलक्षी प्रभाव से समाप्त करना कानूनन गलत है। उनका कहना है कि यह संशोधन केवल शैक्षणिक संवर्ग पर लागू किया गया, जो समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।
कानूनी आपत्तियां
याचिका में कहा गया कि सरकार की यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के भी विपरीत है। भूतलक्षी प्रभाव से वित्तीय लाभ छीना जाना कर्मचारियों के वैध अधिकारों का हनन है, इसलिए आदेश पर रोक जरूरी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शिक्षक संगठनों और प्रवक्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को राहत मिली है। उनका मानना है कि यदि भूतलक्षी संशोधन लागू रहता तो वर्षों के वित्तीय लाभ प्रभावित होते।
आगे क्या होगा
अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का जवाब आने के बाद मामले पर अप्रैल में अगली सुनवाई होगी। तब तक चयन वेतनमान के पुनर्निर्धारण संबंधी 18 दिसंबर 2025 का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
