
देहरादून: देश और दुनिया में तेजी से बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती के बीच उत्तराखंड सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने 28 जनवरी को हुई बैठक में उत्तराखंड हरित हाइड्रोजन पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी। यह नीति भारत सरकार के वर्ष 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य के अनुरूप तैयार की गई है। नीति के लागू होने से उत्तराखंड में जल और सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से हरित हाइड्रोजन का उत्पादन संभव होगा, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति और 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत की थी। इसके तहत सभी राज्यों को हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया। देश के 6–7 राज्यों द्वारा पहले ही इस दिशा में नीतियां बनाई जा चुकी हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड ने भी अपनी भौगोलिक और प्राकृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए हरित हाइड्रोजन पॉलिसी 2026 तैयार की है।
आधिकारिक जानकारी
राज्य सरकार के अनुसार, हरित हाइड्रोजन एक शून्य उत्सर्जन ईंधन है, जो पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में सहायक है। नीति के तहत वर्ष 2030 तक राज्य में प्रति वर्ष 100 किलोटन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं का आवंटन केंद्रीय और राज्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को नामांकन के आधार पर तथा निजी विकासकर्ताओं को प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से किया जाएगा।
वित्त विभाग ने इस नीति को एमएसएमई नीति 2023, मेगा औद्योगिक एवं निवेश नीति 2021 और अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज दिशानिर्देश 2023 से जोड़ने पर सहमति जताई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय उद्योग जगत का कहना है कि इस नीति से उत्तराखंड में निवेश का माहौल बेहतर होगा और राज्य को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। वहीं पर्यावरण से जुड़े लोगों का मानना है कि पहाड़ी राज्य के लिए ग्रीन हाइड्रोजन पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञ की राय
ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के साथ-साथ परिवहन ईंधन के रूप में भी किया जा रहा है। वर्तमान में इसका प्रयोग शिपिंग फ्यूल के तौर पर हो रहा है और भविष्य में ट्रेन, ट्रक और विमान में भी इसके उपयोग की संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि इंडियन रेलवे हरियाणा में प्रायोगिक तौर पर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन कर रहा है।
आंकड़े और प्रावधान
नीति के तहत राज्य सरकार द्वारा ट्रांसमिशन शुल्क और व्हीलिंग शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट तथा विद्युत शुल्क, अतिरिक्त अधिभार और क्रॉस सब्सिडी अधिभार में 100 प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया गया है। इससे राज्य सरकार पर प्रति मेगावाट लोड पर हर वर्ष लगभग 1.21 करोड़ रुपये का व्यय भार आएगा।
आगे क्या होगा
कैबिनेट ने नीति में प्रस्तावित सब्सिडी प्रावधानों पर आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम प्रोत्साहन ढांचे को लागू किया जाएगा और परियोजनाओं के लिए एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली के जरिए स्वीकृतियां दी जाएंगी।







