
देहरादून / हरिद्वार: लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड में ग्रीन सेस वसूली का दूसरा ट्रायल सफल हो गया है। हरिद्वार के नारसन बॉर्डर पर लगे एएनपीआर कैमरों के जरिए कुछ बाहरी राज्यों के वाहनों से फास्टैग खाते के माध्यम से ग्रीन सेस की कटौती की गई। हालांकि प्रक्रिया फिलहाल धीमी है, जिस कारण सभी वाहनों से सेस नहीं कट पा रहा। इस कमी को दूर करने के लिए आईटीडीए सिस्टम अपडेट में जुटा है। ट्रायल के सफल होने के बाद प्रदेशभर में बाहरी वाहनों से ग्रीन सेस वसूली लागू होने की दिशा साफ हो गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में पर्यावरण संरक्षण और सड़क रखरखाव के उद्देश्य से बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए परिवहन विभाग ने प्रदेशभर में एएनपीआर तकनीक आधारित निगरानी तंत्र तैयार किया है।
एएनपीआर कैमरों से कैसे कटेगा ग्रीन सेस
परिवहन विभाग ने प्रदेश में कुल 37 ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए हैं, जिनमें से 15 कैमरे राज्य की सीमाओं पर स्थापित हैं। इन कैमरों के जरिए प्रदेश में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों की पहचान कर उनके फास्टैग खाते से ग्रीन सेस की कटौती की जाएगी।
नारसन चेकपोस्ट से शुरुआत
फिलहाल हरिद्वार के नारसन स्थित चेकपोस्ट के कैमरों ने डेटा भेजना शुरू कर दिया है। कैमरा वाहनों की वीडियो आईटीडीए के डेटा सेंटर तक भेजता है। वीडियो की छंटनी के बाद बाहरी राज्यों की नंबर प्लेट पहचान कर फास्टैग से ग्रीन सेस काटा जा रहा है।
तकनीकी दिक्कतें और सुधार
नारसन बॉर्डर से शुरुआत के दौरान कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आईं। प्रक्रिया धीमी रहने के कारण सभी वाहनों से ग्रीन सेस की कटौती नहीं हो पा रही। इसी वजह से आईटीडीए के विशेषज्ञ सिस्टम को अपग्रेड कर रहे हैं, ताकि पहचान और कटौती की गति बढ़ाई जा सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
परिवहन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सिस्टम पूरी तरह दुरुस्त हो जाता है, तो ग्रीन सेस की वसूली पारदर्शी और निर्बाध होगी। इससे राज्य को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा और पर्यावरणीय पहलों को मजबूती मिलेगी।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार सिस्टम अपग्रेड पूरा होते ही ग्रीन सेस वसूली की प्रक्रिया प्रदेशभर में सुचारु रूप से लागू कर दी जाएगी। आने वाले दिनों में अन्य सीमावर्ती चेकपोस्ट पर भी एएनपीआर कैमरों के जरिए कटौती शुरू होने की संभावना है।




