
देहरादून: उत्तराखंड की 7817 ग्राम पंचायतों के परिवार रजिस्टर में बीते कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में नियम विरुद्ध नाम दर्ज होने का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय बैठक में परिवार रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों की व्यापक, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने के निर्देश दिए हैं। तय किया गया है कि वर्ष 2003 से अब तक दर्ज सभी नामों की गहन पड़ताल की जाएगी। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि बिना जांच के नाम दर्ज होने से सरकारी योजनाओं, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार रजिस्टर सरकारी योजनाओं और सेवाओं का आधार होता है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें किराये पर रहने वाले व्यक्तियों के नाम भी बिना सत्यापन और सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के परिवार रजिस्टर में दर्ज कर दिए गए। इससे न केवल वास्तविक ग्रामीण परिवारों के अधिकार प्रभावित हुए, बल्कि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ी।
आधिकारिक जानकारी
उच्च स्तरीय बैठक में पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों से स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि परिवार रजिस्टर में वर्ष 2003 से दर्ज नामों की गहन जांच कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने और सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
आवेदन और अनियमितताओं का आंकड़ा
पंचायतीराज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली-1970 के तहत परिवार रजिस्टर का पंजीकरण होता है। पिछले वर्ष एक अप्रैल से 31 दिसंबर के बीच परिवार रजिस्टर में नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन और अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों और निरस्त मामलों के बाद फर्जी प्रविष्टियों की आशंका और गहराई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े लोगों का कहना है कि परिवार रजिस्टर में अनधिकृत नाम दर्ज होने से वास्तविक निवासियों को योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत आती है। लोगों ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि निष्पक्ष जांच से व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
डीएम के पास सुरक्षित रहेंगी प्रतियां
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में उपलब्ध परिवार रजिस्टर की प्रतियां तत्काल जिलाधिकारी के पास सुरक्षित रखी जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न रहे। परिवार रजिस्टर की जांच की जिम्मेदारी सीडीओ या एडीएम को सौंपी जाएगी। साथ ही सीमावर्ती सहित सभी जिलों में समान रूप से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नियमावली में संशोधन की तैयारी
सरकार ने यह भी तय किया है कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को स्पष्ट और नियंत्रित करने के लिए मौजूदा नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष लाया जाएगा। इससे भविष्य में नियमों की अस्पष्टता का लाभ उठाकर अनियमित नाम दर्ज कराने की गुंजाइश कम हो सकेगी।
आगे क्या होगा
जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया से परिवार रजिस्टर व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंच सकेगा।






