
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में एस्मा एक्ट लागू कर दिया है, जिसके बाद राज्य सरकार के अधीन आने वाले कर्मचारी अगले छह महीनों तक हड़ताल नहीं कर सकेंगे। फिलहाल प्रदेश में 22 हजार से अधिक उपनल कर्मचारी नियमितीकरण सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, जिन पर अब इस आदेश का सीधा असर पड़ेगा।
पढे़ं- उपनल कर्मियों को समान कार्य समान वेतन का आदेश, सरकार ने किया ऐतिहासिक फैसला
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में उपनल कर्मचारी लंबे समय से वेतनमान, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। राज्य स्थापना दिवस के अगले दिन से ही प्रदेशभर में 22 हजार से अधिक उपनल कर्मी आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर हड़ताल पर चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद नियमितीकरण पर निर्णय न होने से कर्मचारियों का असंतोष बढ़ता गया।
अधिकारिक जानकारी
एस्मा एक्ट लागू होने के बाद सरकार ने ‘नो वर्क-नो पे’ का आदेश भी जारी कर दिया है। आउटसोर्स और उपनल कर्मचारियों को हड़ताल न करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। सभी विभागों को शासन द्वारा इस संबंध में अधिसूचना भेज दी गई है।
अधिकारियों का मानना है कि स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन, निगमों और तकनीकी सेवाओं में हाल के महीनों में बार-बार उत्पन्न हड़ताल की स्थिति से सार्वजनिक सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था, जिसे देखते हुए एस्मा लागू करना आवश्यक माना गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कई विभागों में कार्य प्रभावित हो रहा था। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सेवाओं में अव्यवस्था बढ़ने लगी थी। वहीं, कर्मचारी संगठनों का मानना है कि सरकार उनके मुद्दों का समाधान किए बिना केवल दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी उपनल कर्मचारियों के आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आया है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत आंदोलनस्थलों पर पहुंच चुके हैं और कर्मचारियों की मांगों को न्यायोचित बताते हुए सरकार से समाधान की अपील कर चुके हैं।
एस्मा एक्ट क्या है?
– ESMA लागू होने पर आवश्यक सेवाओं में हड़ताल प्रतिबंधित हो जाती है।
– सरकार इसे 6 महीने या उससे अधिक अवधि के लिए लागू कर सकती है।
– उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कर्मचारी को जेल, जुर्माना, या बिना नोटिस बर्खास्तगी का सामना करना पड़ सकता है।
डेटा / संख्या
– उपनल हड़ताली कर्मचारी: 22,000+
– एस्मा की अवधि: 6 माह (प्रारंभिक अवधि)
– प्रभावित विभाग: स्वास्थ्य, ऊर्जा, परिवहन, निगम, तकनीकी सेवाएं
आगे क्या
एस्मा लागू होने के बाद उपनल कर्मचारियों के भविष्य की रणनीति पर सबकी नजर है। सरकार की ओर से बातचीत की संभावनाएं जताई जा रही हैं, जबकि कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि वे कानूनी विकल्पों और शांतिपूर्ण आंदोलन के अन्य मार्गों पर विचार करेंगे। मामले के समाधान के लिए आने वाले कुछ दिनों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







