
देहरादून: उत्तराखंड राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री से 21 अक्टूबर 2025 को दीपावली के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग की है। परिषद का कहना है कि स्थानीय पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस साल दीपावली का मुख्य पर्व 21 अक्टूबर को है, जबकि सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना में 20 अक्टूबर को अवकाश घोषित किया गया है। परिषद ने इस तिथि को संशोधित करने की अपील की है ताकि भ्रम की स्थिति न रहे।
कर्मचारी परिषद की मांग
प्रदेश महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा, “दीपावली हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो उत्तराखंड में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से व्यापक रूप से मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, 21 अक्टूबर को दीपावली का मुख्य पर्व है, लेकिन शासन की अधिसूचना में 20 अक्टूबर को अवकाश दर्शाया गया है।”
उन्होंने मांग की कि कर्मचारियों और आम जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए 21 अक्टूबर को अवकाश घोषित किया जाए। 2024 की एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में 90% लोग धार्मिक पर्वों के लिए सही तिथि पर अवकाश को महत्व देते हैं, जिसने इस मांग को और प्रासंगिक बनाया है।
नैनीताल इकाई का समर्थन
परिषद के जिला नैनीताल अध्यक्ष असलम अली ने भी प्रांतीय नेतृत्व को पत्र लिखकर इस मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “दीपावली के अवकाश को लेकर भ्रम की स्थिति से बचने के लिए शासन को तुरंत संशोधित आदेश जारी करना चाहिए।” परिषद ने जोर दिया कि सही तिथि पर अवकाश से कर्मचारियों और नागरिकों को पर्व को पूरे उत्साह से मनाने का अवसर मिलेगा।
दीपावली का महत्व
शक्ति प्रसाद भट्ट ने कहा, “दीपावली उत्तराखंड में आस्था, सद्भाव, और प्रकाश का पर्व है। यह जरूरी है कि सरकार सही तिथि पर अवकाश घोषित कर सभी को इसे मनाने का मौका दे।” 2024 में दीपावली के दौरान उत्तराखंड में 50 लाख से अधिक लोग विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हुए थे, जो इस पर्व के व्यापक महत्व को दर्शाता है।
सरकार की अधिसूचना पर सवाल
सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना में 20 अक्टूबर को अवकाश घोषित किया गया है, लेकिन परिषद का कहना है कि यह पंचांग और धार्मिक परंपराओं के विपरीत है। स्थानीय निवासी रमेश जोशी ने कहा, “दीपावली हमारा सबसे बड़ा त्योहार है। गलत तारीख पर छुट्टी से पूजा और उत्सव प्रभावित हो सकते हैं। सरकार को इसे ठीक करना चाहिए।”







