
देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणाओं को लेकर शासन स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकों का दौर जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार अपेक्षित नहीं दिख रही है। स्थिति यह है कि 2021-22 की कई घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं, जबकि चुनावी वर्ष नजदीक आता जा रहा है। एक ओर मुख्यमंत्री खुद समय-सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विधायकों के विकास प्रस्ताव भी धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं। यह अंतर सरकार के लिए प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
सरकारी समीक्षा बैठकों में सामने आया है कि बीते वर्षों में की गई घोषणाओं का बड़ा हिस्सा अभी भी प्रक्रियाओं में अटका है। वर्ष 2021 की 156, 2022 की 75 और 2023 की 176 घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं। इस स्थिति पर शासन स्तर पर नाराजगी जताई गई है और लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
शासन के अनुसार, प्रमुख सचिव स्तर से एक महीने के भीतर लंबित घोषणाओं को पूरा करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद कई परियोजनाओं पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
शासन ने जिलाधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश देते हुए तय किया है कि मुख्यमंत्री की किसी भी घोषणा की जानकारी 72 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री के घोषणा अनुभाग तक पहुंचे। साथ ही, जिलाधिकारी संबंधित विभागों की पहचान कर समय-सीमा तय करेंगे और फाइलों की अनावश्यक आवाजाही रोकने के लिए नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
विपक्ष ने लंबित घोषणाओं को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता अमेंद्र बिष्ट का कहना है कि मंच से घोषणाएं तो हो जाती हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर उतारने में प्रशासनिक इच्छाशक्ति और ठोस योजना की कमी दिखती है।
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश जोशी का कहना है कि कई घोषणाओं में भूमि, बजट, तकनीकी मंजूरी और केंद्र से समन्वय जैसी प्रक्रियाओं के कारण समय लगता है, फिर भी सरकार चरणबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे करने का प्रयास कर रही है।
आंकड़े और तथ्य
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री धामी अपने कार्यकाल में करीब 3827 घोषणाएं कर चुके हैं। इनमें से 2315 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1457 घोषणाएं अभी लंबित हैं।
इन लंबित घोषणाओं में से करीब 520 ऐसी हैं, जिन पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ।
इसके अलावा, विधायकों से मांगे गए 10-10 विकास प्रस्तावों के आधार पर 573 कार्यों को प्राथमिकता दी गई थी, जिनमें से अब तक 222 ही पूरे हो सके हैं।
आगे क्या होगा
शासन का कहना है कि आगामी दिनों में लंबित घोषणाओं की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाई जाएगी। जिलाधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपते हुए समय-सीमा तय की जा रही है, ताकि घोषणाएं फाइलों से निकलकर जमीन पर दिख सकें। चुनावी वर्ष को देखते हुए सरकार के लिए इन कार्यों को समय पर पूरा करना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
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