
देहरादून: उत्तराखंड में तेजी से उभर रहे एस्ट्रो-टूरिज्म सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में एक अहम पहल के तहत राज्य के 200 से अधिक स्थानीय युवाओं को एस्ट्रो-टूरिज्म गाइड के रूप में प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया गया है। यह प्रशिक्षण उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद और टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल काउंसिल के सहयोग से स्टारस्केप्स द्वारा संचालित राज्यव्यापी स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत दिया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान करते हुए सस्टेनेबल टूरिज्म और डार्क-स्काई संरक्षण को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड का भौगोलिक स्वरूप और अपेक्षाकृत स्वच्छ रात्रि आकाश इसे एस्ट्रो-टूरिज्म के लिए उपयुक्त बनाता है। बदलते पर्यटन रुझानों के बीच अब प्रकृति आधारित और अनुभवात्मक पर्यटन की मांग बढ़ रही है, जिसमें स्टारगेजिंग और नाइट-स्काई एक्सपीरियंस अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी जरूरत को देखते हुए राज्य में एस्ट्रो-टूरिज्म को संगठित रूप देने की दिशा में यह पहल शुरू की गई।
आधिकारिक जानकारी
स्टारस्केप्स के फाउंडर रामाशीष रे ने बताया कि यह कार्यक्रम छह माह की अवधि में 500 से अधिक युवाओं को एस्ट्रो-टूरिज्म से जुड़ी व्यावसायिक दक्षताएं देने की व्यापक योजना का हिस्सा है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की अपर निदेशक पूनम चंद के अनुसार यह पहल राज्य में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने में सहायक होगी। कार्यक्रम को उत्तराखंड सरकार का समर्थन प्राप्त है।
एस्ट्रोनॉमी से हॉस्पिटैलिटी तक समग्र प्रशिक्षण
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में एस्ट्रोनॉमी और रात्रि आकाश की मूल जानकारी, टेलीस्कोप संचालन, गाइडेड स्टारगेजिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण और मोबाइल फोन व शुरुआती कैमरों से बेसिक एस्ट्रोफोटोग्राफी शामिल है। इसके साथ ही प्रतिभागियों को डार्क-स्काई संरक्षण, जिम्मेदार पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी स्किल्स, स्टोरीटेलिंग और कम्युनिटी-लेड टूरिज्म मॉडल पर भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रतिभागियों का कहना है कि इस प्रशिक्षण से उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर मिले हैं।
ऋषिकेश की सर्टिफाइड एस्ट्रो-टूरिज्म गाइड मोनिका रावत ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद वे आत्मविश्वास के साथ स्टारगेजिंग सेशन संचालित कर पा रही हैं और अपने होमस्टे के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।
राज्य के कई क्षेत्रों में हो चुकी हैं वर्कशॉप
अब तक मुनस्यारी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर, लोहाघाट और पिथौरागढ़ में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। आने वाले समय में लैंसडौन, कर्णप्रयाग, अल्मोड़ा, नैनीताल और चोपता सहित अन्य डार्क-स्काई क्षेत्रों में भी वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी।
कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
यह पहल विशेष रूप से स्थानीय युवाओं और होमस्टे संचालकों को लक्षित करती है, ताकि वे स्टारगेजिंग जैसे अनुभवों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें और साथ ही उत्तराखंड के प्राकृतिक रात्रि आकाश का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।
आगे क्या?
कार्यक्रम अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक चलेगा। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रतिभागियों को टीएचएसी से सरकार-मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेशन दिया जा रहा है, जिससे उन्हें टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।







