
देहरादून: उत्तराखंड में सर्दियों के साथ वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश की राजधानी देहरादून में AQI 300 के पार पहुंच चुका है, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। हालात सिर्फ देहरादून तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऋषिकेश और हल्द्वानी जैसे शहरों में भी हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। लगातार कई दिनों से बढ़े AQI ने लोगों की सेहत और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नवंबर और दिसंबर के महीनों में सामने आने वाले मौसमी कारक हर साल उत्तराखंड के शहरों में प्रदूषण बढ़ाते हैं। खासतौर पर इंडो-गैंगेटिक प्लेन्स में सक्रिय थर्मल इन्वर्जन का असर पहाड़ी क्षेत्रों के पास बसे शहरों तक पहुंच रहा है। इसके कारण वातावरण में मौजूद प्रदूषक गैसें और सूक्ष्म कण निचली परतों में फंस जाते हैं।
आधिकारिक जानकारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार थर्मल इन्वर्जन की स्थिति में ऊपरी वातावरण अपेक्षाकृत गर्म और निचली सतह ठंडी हो जाती है, जिससे PM 2.5 और PM 10 जैसे कण ऊपर नहीं उठ पाते। इसके साथ हवा का सर्कुलेशन कम होना, बारिश की कमी, ठंड के चलते अलाव जलाना और स्थानीय स्रोतों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण को और बढ़ा रहा है। बोर्ड का दावा है कि हालात को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम और रात के समय प्रदूषण का असर ज्यादा महसूस हो रहा है। आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और गले में खराश जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। लोगों ने प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने और निर्माण कार्यों पर सख्ती की मांग की है।
आंकड़े / तथ्य
देहरादून में AQI कई बार 300 के पार रिकॉर्ड किया गया। लगातार कई दिनों से AQI 250 से अधिक बना हुआ है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देहरादून और ऋषिकेश की रैंकिंग क्रमशः 15 और 16 तक पहुंची है।
पर्यटन और निर्माण कार्य भी कारण
नए साल के आगमन के साथ राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा, शहरों में चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बन रही है, जिससे AQI में और इजाफा हो रहा है।
आगे क्या होगा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों के सख्त पालन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर काम किया जा रहा है। साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इन प्रयासों के चलते आने वाले समय में एयर क्वालिटी इंडेक्स में सुधार देखने को मिलेगा।







