
देहरादून: उत्तराखंड में लंबे समय से उपनल कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 10 वर्ष तक निरंतर सेवा देने वाले उपनलकर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतनमान देने को मंजूरी दे दी गई है। यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, जिससे पहले चरण में करीब 8 हजार और कुल मिलाकर 21 हजार से अधिक उपनलकर्मी लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही कैबिनेट ने होम स्टे योजना, समान नागरिक संहिता संशोधन, विशेष न्यायालयों के गठन समेत 19 प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
पढे़ं- उपनल कर्मियों को समान कार्य समान वेतन का आदेश, सरकार ने किया ऐतिहासिक फैसला
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उपनल कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से समान कार्य–समान वेतन की मांग उठाई जा रही थी। इस संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश और गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिशों पर सरकार विचार कर रही थी। आठ दिसंबर 2025 को उपसमिति की बैठक के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा गया।
उपनलकर्मियों को क्या मिलेगा लाभ
कैबिनेट ने तय किया है कि उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मियों को 10 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने पर समान कार्य–समान वेतन का लाभ दिया जाएगा।
पहले चरण में राज्य गठन से वर्ष 2015 तक लगातार 10 वर्ष सेवा देने वाले करीब 8 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे। इसके बाद 2016 और फिर 2018 तक के कर्मियों को चरणबद्ध तरीके से यह लाभ मिलेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में उपनल के माध्यम से केवल पूर्व सैनिकों के पुनर्वास से जुड़े कार्य ही कराए जाएंगे।
समान नागरिक संहिता में संशोधन
कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) उत्तराखंड संशोधन अध्यादेश लाने पर भी सहमति दे दी है। संशोधन के तहत जनवरी 2025 से पहले विवाह करने वालों को पंजीकरण के लिए छह माह के बजाय एक वर्ष का समय मिलेगा।
इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल का पद अब सचिव के बजाय अपर सचिव स्तर के अधिकारी को सौंपा जा सकेगा। समय से कार्य न करने पर जुर्माने की जगह दंडात्मक पेनाल्टी का प्रावधान किया जाएगा। यह संशोधन लिपिकीय त्रुटियों और व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए लाया जा रहा है।
होम स्टे योजना में बड़ा बदलाव
उत्तराखंड पर्यटन, यात्रा व्यवसाय, होम स्टे एवं बेड एंड ब्रेकफॉस्ट पंजीकरण नियमावली–2026 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत होम स्टे योजना का लाभ अब केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासियों को मिलेगा।
बाहरी राज्यों के लोग होम स्टे संचालित नहीं कर सकेंगे, वे केवल बेड एंड ब्रेकफॉस्ट योजना के तहत ही कार्य कर पाएंगे।
बजट सत्र को लेकर फैसला
कैबिनेट ने उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र को मंजूरी दे दी है। सत्र की तिथि और स्थान तय करने का अधिकार मुख्यमंत्री को दिया गया है। अभी यह तय होना बाकी है कि सत्र देहरादून में होगा या ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में।
16 विशेष न्यायालय और 144 नए पद
एनडीपीएस, पॉक्सो, एनआई एक्ट और पीएमएलए से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रदेश में 16 विशेष न्यायालय बनाए जाएंगे।
पहले चरण में देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में सात एडीजे और नौ एसीजेएम स्तर के न्यायालय गठित होंगे। इनके लिए 144 पदों के सृजन को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
अन्य अहम फैसले
कैबिनेट बैठक में पेराई सत्र 2025-26 के लिए चीनी मिलों को 270 करोड़ से अधिक की स्टेट गारंटी, गन्ने के नए मूल्य, संस्कृत अकादमी का नाम परिवर्तन, विज्ञान केंद्रों में पद सृजन, बागवानी मिशन में एंटी हेल नेट पर अतिरिक्त सहायता, खेल महाकुंभ पुरस्कार राशि, ब्रिडकुल को नई निर्माण जिम्मेदारियां, और केदारनाथ धाम में पर्यावरण अनुकूल ईंधन पैलेट के पायलट प्रोजेक्ट जैसे कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उपनलकर्मियों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने वाला है। वहीं कर्मचारी संगठनों ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए शीघ्र क्रियान्वयन की मांग की है।
आगे क्या होगा
कैबिनेट के फैसलों के बाद संबंधित विभागों को आदेश जारी किए जाएंगे। उपनलकर्मियों को चरणबद्ध तरीके से लाभ दिया जाएगा, जबकि यूसीसी संशोधन अध्यादेश लाकर आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।





