
देहरादून: समान कार्य के बदले समान वेतन और नियमितीकरण की मांग को लेकर उपनल कर्मियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को सरकार के साथ आठवीं वार्ता विफल होने के बाद कर्मचारियों ने आक्रोश जताते हुए सैनिक कल्याण सचिव का पुतला दहन किया और “नो वर्क नो पे” आदेश की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में उपनल कर्मी कई महीनों से नियमितीकरण और वेतन समानता की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। न्यायालय में चल रही सुनवाई और सरकार की ओर से बनी उप-समिति के बावजूद उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। हाल में सरकार द्वारा जारी “नो वर्क नो पे” आदेश ने आंदोलन को और तीखा बना दिया है।
अधिकारिक जानकारी
बुधवार को भी सरकार और कर्मचारियों के बीच हुई वार्ता बिना किसी समाधान के समाप्त हो गई। इसके बाद कर्मचारियों ने हरिद्वार रोड स्थित धरना स्थल पर सैनिक कल्याण सचिव दीपेंद्र चौधरी का पुतला दहन किया।
संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने आरोप लगाया कि “सरकार उपनल कर्मियों का शोषण कर रही है। एक ओर नियमितीकरण के नाम पर समिति बनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को डराने के लिए आदेश जारी होते हैं।”
शासन द्वारा जारी आदेश में पूर्व सैनिक कल्याण निगम को निर्देश दिए गए हैं कि हड़ताल पर चल रहे उपनल कर्मियों को चिन्हित कर उनकी अनुपस्थिति दर्ज की जाए तथा “नो वर्क नो पे” नियम का कड़ाई से पालन कराया जाए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। कई कर्मचारियों ने बताया कि सरकार की ओर से बार-बार वार्ता का आश्वासन मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, जिससे उनमें निराशा और नाराज़गी बढ़ रही है।
स्थानीय राजनीतिक संगठनों से भी समर्थन मिलने लगा है। बीते दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी धरना स्थल पर पहुंचे और कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया।
विशेषज्ञ टिप्पणी
श्रम मामलों के जानकारों का कहना है कि लगातार बढ़ते टकराव का समाधान केवल नीति-स्तर पर स्पष्ट निर्णय से ही संभव है। यदि सरकार समान कार्य के लिए समान वेतन संबंधी निर्देशों को लागू करती है, तो कई विभागों में संविदा कर्मियों को राहत मिल सकती है।
डेटा / आंकड़े
- धरना अवधि: 11 दिन
- वार्ताएं: 8 बार, सभी विफल
- प्रमुख मांगें: समान वेतन, नियमितीकरण
- सरकारी कार्रवाई: नो वर्क नो पे आदेश, अनुपस्थिति दर्ज करने के निर्देश
- समर्थन: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने जताया समर्थन
आगे क्या?
संयुक्त मोर्चा ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी दबाव में आंदोलन वापस नहीं लेंगे। आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक हो सकता है, यदि सरकार इसके समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाती। प्रशासन द्वारा नए आदेश के लागू होने से कर्मचारियों की स्थिति और जटिल होने की आशंका है।






