
नैनीताल: उपनल संविदा कर्मियों की अवमानना याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार ने आश्वस्त किया कि समान कार्य के लिए समान वेतन का आदेश जल्द लागू किया जाएगा। न्यायालय ने दिसंबर माह से न्यूनतम वेतन के अनुपालन में देरी को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि आदेश मानने में किसी प्रकार की ढिलाई या टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में उपनल कर्मी लंबे समय से समान वेतन, सेवा शर्तों में सुधार और नियमितीकरण की मांग उठा रहे हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की। हाल के दिनों में कर्मियों के धरना–प्रदर्शन और सरकार द्वारा एस्मा लागू किए जाने से विवाद और गहरा गया है।
अधिकारिक जानकारी
अवमानना याचिका में मुख्य सचिव आनंद वर्धन को प्रतिवादी बनाया गया है। सुनवाई के दौरान मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने जानकारी दी कि सरकार आदेश का पालन करने को तैयार है और जल्द ही समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाएगा।
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दिसंबर 2024 से न्यूनतम वेतन लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही राज्य द्वारा समिति गठन की जानकारी पर कोर्ट ने कहा कि आदेश का “प्रत्यक्ष और प्रभावी” अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कर्मचारी संगठनों द्वारा सड़क पर किए जा रहे उग्र प्रदर्शनों पर नाराज़गी जताई। अदालत ने कहा कि यह गतिविधियां कानून की दृष्टि में उचित नहीं हैं और राज्य सरकार ऐसे हालात पर नियंत्रण रखे।
न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन की स्थिति रिपोर्ट 12 फरवरी तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
उपनल कर्मियों का कहना है कि वे वर्षों से समान वेतन और नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कुछ कर्मियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की रिव्यू याचिका खारिज होने के बाद अब सरकार को जल्दी कदम उठाने चाहिए। स्थानीय कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब कोर्ट आदेश पर जोर दे रहा है, तो सरकार को भी स्पष्ट समयसीमा तय कर कार्रवाई करनी चाहिए।
विशेषज्ञ टिप्पणी
श्रम कानूनों से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है कि “समान कार्य के लिए समान वेतन” का सिद्धांत न्यायपालिका द्वारा कई मामलों में दोहराया जा चुका है। यदि आदेश लागू होता है, तो यह उत्तराखंड में हजारों संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ा राहत कदम साबित होगा।
डेटा / आंकड़े
- अवमानना याचिका में प्रतिवादी: मुख्य सचिव आनंद वर्धन
- स्थिति रिपोर्ट तिथि: 12 फरवरी
- संविदा कर्मचारी: उपनल के हजारों कर्मचारी
- हालिया घटनाक्रम: एस्मा लागू, नो वर्क नो पे आदेश
- सुप्रीम कोर्ट: रिव्यू याचिका खारिज
आगे क्या?
अगली सुनवाई में राज्य सरकार को स्पष्ट स्थिति रिपोर्ट पेश करनी होगी। यदि आदेश के पालन में देरी या अस्पष्टता पाई जाती है, तो न्यायालय कड़ी कार्रवाई कर सकता है। उपनल कर्मियों की नियमितीकरण मांग पहले ही कैबिनेट समिति की सिफारिशों के कारण विवाद में है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने की संभावना है।







