
पौड़ी गढ़वाल के चवथ पट्टी इडवालस्यूं गांव में गुलदार के हमले से 42 वर्षीय राजेंद्र की दर्दनाक मृत्यु के बाद क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है। घटना की गंभीरता को देखते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने वन विभाग के अधिकारियों से तत्काल वार्ता की और गुलदार को ट्रैंकुलाइज करने तथा आवश्यक परिस्थितियों में अंतिम विकल्प के रूप में नष्ट करने तक के निर्देश जारी किए।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पौड़ी और टिहरी जिलों में पिछले कुछ समय से गुलदार की गतिविधियों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। जंगल से सटे गांवों में रात के समय वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ने से ग्रामीणों में भय बना हुआ है। इडवालस्यूं गांव में कई स्थानीय लोगों ने बताया कि गुलदार को लगातार आसपास घूमते देखा गया था, लेकिन हालिया घटना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
औपचारिक जानकारी
घटना की जानकारी मिलते ही वन मंत्री सुबोध उनियाल ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वन विभाग के उच्च अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए। मंत्री के निर्देशों के बाद मुख्य वन संरक्षक/मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उत्तराखंड द्वारा आदेश संख्या 1900/6-28 दिनांक 04 दिसम्बर 2025 जारी करते हुए गुलदार को पकड़ने के लिए ट्रैंकुलाइज करने के निर्देश दिए गए। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि ट्रैंकुलाइज करने के प्रयास विफल हो जाएँ और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो अंतिम विकल्प के रूप में अधिकृत कर्मी गुलदार को नष्ट कर सकते हैं।
वन विभाग को 15 दिनों की विशेष अनुमति दी गई है, जिसके दौरान क्षेत्र में कैमरा ट्रैप, ड्रोन, मॉनिटरिंग, पीटीएस रैंक और पिंजरा लगाने जैसी तकनीकों के माध्यम से गुलदार की गतिविधियों का पता लगाया जाएगा। विभागीय टीम घटनास्थल पर मौजूद है और इलाके में सर्च अभियान चलाया जा रहा है। मृतक परिवार को नियमों के अनुसार सहायता की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई दिनों से गुलदार गांव के आसपास दिखाई दे रहा था, जिससे लोग पहले से ही डरे हुए थे। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और भय और बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और महिलाओं को घरों से बाहर निकलने में अब डर लग रहा है। कई लोगों ने सरकार से स्थायी समाधान की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
आगे क्या?
वन विभाग आगामी दिनों में इलाके की गहन निगरानी करेगा और तकनीकी साधनों की मदद से गुलदार को पकड़ने का प्रयास जारी रहेगा। 15 दिन की अनुमति अवधि के भीतर स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। यदि गुलदार सुरक्षित रूप से पकड़ा नहीं जा सका और उसके व्यवहार में आक्रामकता बनी रही, तो विभाग अंतिम विकल्प पर भी विचार कर सकता है।





