
देहरादून: काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले को लेकर उत्तराखंड में सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। शुक्रवार को उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पुलिस मुख्यालय का घेराव करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि करोड़ों की कथित धोखाधड़ी और गंभीर आरोपों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। पार्टी डीजीपी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगी और मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन को और तेज करने का संकेत दिया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो साझा किया था, जिसमें जमीन सौदे के नाम पर करीब चार करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और पुलिस स्तर पर कार्रवाई न होने के आरोप लगाए गए थे। घटना के बाद यह मामला प्रदेशभर में चर्चा में आ गया और जांच व जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे।
आधिकारिक जानकारी
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी ने बताया कि पार्टी पुलिस मुख्यालय पहुंचकर डीजीपी से मुलाकात करेगी और ज्ञापन देगी। उनका कहना है कि अब तक जिस स्तर की कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं दिखी। उन्होंने यह भी कहा कि मृतक किसान के परिजन लगातार उधम सिंह नगर के एसएसपी की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, इसलिए जब तक वहां कार्रवाई नहीं होती, कांग्रेस आंदोलन जारी रखेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसान की मौत ने व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्राथमिकता है।
कुछ सामाजिक संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस की अब तक की कार्रवाई
पुलिस की ओर से मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। आरोपों के दायरे में आए पुलिसकर्मियों में से दो को निलंबित किया गया है, जबकि दस को लाइन हाजिर किया गया है। सभी संबंधित पुलिसकर्मियों के तबादले कुमाऊं से गढ़वाल रेंज में किए गए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस का कहना है कि कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
आंकड़े / तथ्य
कथित धोखाधड़ी की राशि लगभग 4 करोड़ रुपये बताई गई है। मामले में एसआईटी गठित की गई है। 2 पुलिसकर्मी निलंबित और 10 लाइन हाजिर किए गए हैं।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस मुख्यालय में मुलाकात और ज्ञापन के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ी तो अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन का विकल्प भी खुला रखा गया है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर आगे की दिशा तय होगी।







