
उत्तरकाशी: सीमांत जनपद उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक में इन दिनों क्षेत्र के ईष्ट देव सोमेश्वर महाराज के पारंपरिक देवगोती मेले की रौनक देखने को मिल रही है। 15 गते माघ से शुरू हुआ यह मेला पंचगाई अडोर और बड़ासु पट्टी के 22 गांवों में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान गांव-गांव पहुंच रही देव डोलियों के स्वागत में ध्याणियां अपने आराध्य देव को विशेष भेंट-चढ़ावा अर्पित कर रही हैं, जबकि ग्रामीण रासो और तांदी नृत्य के माध्यम से सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
देवगोती मेले का शुभारंभ 15 गते माघ को जखोल स्थित सोमेश्वर महाराज की मूल थाती मंदिर से देव डोली के बाहर आने के साथ हुआ। इसके बाद यह मेला जखोल से प्रारंभ होकर तीनों पट्टियों के 22 गांवों में 22 दिनों तक क्रमशः आयोजित किया जाता है। पर्वतीय अंचल में यह मेला वसंत ऋतु के आगमन और हरियाली उत्सव का प्रतीक माना जाता है। मेले की तिथियां जखोल के राज पुरोहितों द्वारा सोमेश्वर महाराज की आज्ञा से तय की जाती हैं।
परंपरा और अनुष्ठान
22 दिवसीय मेले के दौरान देव डोलियां क्षेत्रवासियों की कुशलता और समृद्धि की कामना को लेकर गांव-गांव भ्रमण करती हैं। परंपरा के अनुसार रात्रि में डोलियां जखोल गांव में खस्सों के घरों में विश्राम करती हैं, जबकि दिन में संबंधित गांवों में विराजमान होती हैं। इसके बाद पूरी रात देव स्तुति, रासो-तांदी और सामूहिक नृत्य का आयोजन होता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों रामध्यान, जैन सिंह, कृपाल सिंह और जनक सिंह का कहना है कि देवगोती मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ग्रामीणों के अनुसार सोमेश्वर महाराज की देव डोली के आगमन से गांवों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोग पूरे हर्षोल्लास के साथ मेले में भाग लेते हैं।
सांस्कृतिक महत्व
मेले के दौरान ढोल-दमाऊ, रणसिंघा और धौंस जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। 22 गांवों के बाजगी इस आयोजन में सहभागी बनते हैं, जिससे स्थानीय लोक-संस्कृति और पारंपरिक नृत्य-गीतों को जीवंत मंच मिलता है।
आगे क्या होगा
देवगोती मेला आगामी दिनों में पंचगाई अडोर और बड़ासु पट्टी के शेष गांवों में क्रमशः आयोजित होगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस पारंपरिक आयोजन के माध्यम से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और सामाजिक सौहार्द बना रहेगा।







