
धर्म डेस्क: Shattila Ekadashi 2026 को लेकर श्रद्धालुओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि षटतिला एकादशी का व्रत 13 जनवरी को रखा जाएगा या 14 जनवरी को। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आने वाला यह व्रत तिल (तिलहन) से जुड़े छह पुण्य कर्मों के कारण विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और सही विधि से करने पर व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
ऋषिकेश सहित पूरे उत्तराखंड में षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व विशेष रूप से देखा जाता है। गंगा तटों, मंदिरों और घरों में इस दिन व्रत, दान और पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसे में सही तिथि जानना और विधि के अनुसार व्रत करना अत्यंत आवश्यक है।
षटतिला एकादशी 2026 की सही तिथि कब है?
पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 जनवरी 2026 की रात से प्रारंभ होकर 14 जनवरी 2026 की रात तक रहेगी। धार्मिक परंपरा के अनुसार उदयातिथि को मान्यता दी जाती है।
इस कारण षटतिला एकादशी का व्रत मंगलवार, 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इसी दिन व्रत, पूजा और दान करना शास्त्रसम्मत माना जाएगा।
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षटतिला एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व
षटतिला एकादशी को “षट” यानी छह और “तिला” यानी तिल से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन तिल से जुड़े छह कर्म विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी होता है जो आर्थिक संकट, मानसिक तनाव या पितृ दोष से ग्रसित हों।
ऋषिकेश जैसे धार्मिक नगर में इस दिन गंगा स्नान, तिल दान और विष्णु पूजा का अलग ही महत्व माना जाता है।
षटतिला एकादशी पर किए जाने वाले छह पुण्य कर्म
| क्रम | पुण्य कर्म | धार्मिक महत्व |
|---|---|---|
| 1 | तिल से स्नान | शरीर और आत्मा की शुद्धि, पापों का नाश |
| 2 | तिल का उबटन | नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति |
| 3 | तिल से हवन | वातावरण की शुद्धि और देव कृपा |
| 4 | तिल का दान | अक्षय पुण्य और पितृ दोष शांति |
| 5 | तिल मिश्रित भोजन | स्वास्थ्य लाभ और व्रत की पूर्णता |
| 6 | तिल का दीपक जलाना | भगवान विष्णु की विशेष कृपा |
षटतिला एकादशी 2026 की पूजा विधि
व्रत रखने वाले श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या शुद्ध जल से स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान करें। पूजा स्थल पर पीले वस्त्र, पुष्प, धूप, दीप और तिल अर्पित करें।
भगवान विष्णु को तिल मिश्रित नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना जाता है। दिनभर एकादशी व्रत का पालन करें और शाम को विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ करें। अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें।
आज के समय में षटतिला एकादशी का महत्व
वर्तमान समय में जब जीवन तनाव और असंतुलन से भरा है, षटतिला एकादशी का व्रत आत्मशुद्धि और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। तिल का सेवन शरीर को ऊर्जा देता है और दान करने से सामाजिक संतुलन भी बना रहता है। यही कारण है कि यह व्रत आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
Shattila Ekadashi 2026 का व्रत 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। सही तिथि, विधि और श्रद्धा के साथ किया गया षटतिला एकादशी व्रत न केवल धार्मिक पुण्य प्रदान करता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी देता है। यदि आप इस वर्ष यह व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो पंचांग अनुसार समय और विधि का विशेष ध्यान रखें।







