
देहरादून। नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर जारी टेंडर प्रक्रिया में सामने आई संभावित गड़बड़ियों की तस्वीर आज या अगले दो दिनों में साफ हो सकती है। महापौर कोटे के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों की जांच लगभग पूरी कर ली गई है और अंतिम रिपोर्ट प्रशासन को सौंपने की तैयारी है। जांच के दौरान कई प्रस्तावों में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिससे टेंडर प्रक्रिया में बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर ही संशोधित टेंडर सूची को अंतिम रूप देकर वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे, जिससे आगे की विकास योजनाओं की दिशा तय होगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नगर निगम के तहत कराए जाने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। हाल के दिनों में टेंडर सूची में डुप्लीकेसी और तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासन ने महापौर कोटे के प्रस्तावों की विशेष जांच शुरू कराई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ही कार्य के लिए अलग-अलग विभागों से दोबारा टेंडर न निकाले जाएं और सरकारी धन का दुरुपयोग न हो।
आधिकारिक जानकारी
नगर निगम देहरादून के अधिकारियों के अनुसार टेंडर सूची की प्रारंभिक जांच में छह विकास कार्यों में डुप्लीकेसी पाए जाने पर उन्हें पहले ही प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद शेष प्रस्तावों की गहन तकनीकी और भौतिक जांच की गई। अधिकारियों का कहना है कि आगे केवल वही कार्य स्वीकृत होंगे, जो सभी मानकों पर पूरी तरह सही पाए जाएंगे।
जांच अधिकारी एवं उप नगर आयुक्त तनवीर मारवाह ने बताया कि सभी प्रस्तावों की विस्तृत जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे दो दिन के भीतर प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद ही संशोधित टेंडर सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है तो विकास कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी। कुछ नागरिकों ने यह भी उम्मीद जताई कि इस जांच से भविष्य में एक ही काम के बार-बार टेंडर निकलने की समस्या पर रोक लगेगी।
आंकड़े / तथ्य
जांच के दौरान अब तक छह विकास कार्य डुप्लीकेसी पाए जाने पर बाहर किए जा चुके हैं। शेष प्रस्तावों की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच की जा रही है। निर्माण अनुभाग पुराने प्रस्तावों के साथ-साथ नए प्राप्त प्रस्तावों को भी रिकॉर्ड में शामिल कर रहा है, ताकि आगामी टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की दोहराव की स्थिति न बने।
आगे क्या
अधिकारियों के अनुसार नए प्रस्तावों को आगामी टेंडर प्रक्रिया में तभी शामिल किया जाएगा, जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि संबंधित कार्य पहले से एमडीडीए या किसी अन्य विभाग द्वारा कराए गए कार्यों की श्रेणी में नहीं आते। रिपोर्ट आने के बाद न केवल संशोधित सूची जारी की जाएगी, बल्कि गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की पहचान कर जवाबदेही भी तय की जाएगी।
पारदर्शी व्यवस्था के निर्देश
महापौर सौरभ थपलियाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि किसी भी कीमत पर डुप्लीकेसी वाले कार्यों को शामिल न किया जाए और सभी विकास कार्यों में नियमों का सख्ती से पालन हो।




