
ऋषिकेश: ओडिशा के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को ऋषिकेश में रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) की परियोजना साइट का दौरा किया। यह प्रेस टूर भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें ओडिशा के पत्रकारों को उत्तराखंड की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं की प्रगति से अवगत कराया गया।
आरवीएनएल के डीजीएम (सिविल) ओम प्रकाश मालगुरी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना की प्रगति और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना हिमालयी क्षेत्र में शुरू की गई सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पहलों में से एक मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
125 किलोमीटर लंबी है रेल लाइन
प्रोजेक्ट साइट के दौरे के दौरान अधिकारियों ने बताया कि यह रेल लाइन लगभग 125 किलोमीटर लंबी है, जिसे करीब 37 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है। यह रेल मार्ग ऋषिकेश से शुरू होकर गढ़वाल के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से गुजरते हुए कर्णप्रयाग तक पहुंचेगा।
यह परियोजना उत्तराखंड के पांच जिलों—देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली—से होकर गुजरती है। इसके पूरा होने से पूरे गढ़वाल क्षेत्र में यातायात और संपर्क व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सुरंगों और पुलों से भरा चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट
अधिकारियों के अनुसार इस रेल मार्ग का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है, जिससे यह देश के सबसे अधिक सुरंगों वाले रेलवे प्रोजेक्ट्स में शामिल हो गया है। परियोजना के तहत 100 किलोमीटर से अधिक लंबाई की 16 बड़ी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है।
इसके अलावा गहरी घाटियों और पहाड़ी नदियों पर कई बड़े पुल भी बनाए जा रहे हैं, जिससे यह परियोजना इंजीनियरिंग के लिहाज से बेहद जटिल मानी जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
आरवीएनएल के अधिकारियों ने मीडिया प्रतिनिधियों को बताया कि यह परियोजना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में विकास और कनेक्टिविटी को नई दिशा देगी। इसके पूरा होने से यात्रा समय कम होगा और पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।







