
ऋषिकेश के एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के चलते हेल्थ एटीएम वर्षभर से बंद पड़े हैं। कोरोना काल के बाद लाखों रुपये की लागत से लगाए गए ये उपकरण मरीजों को त्वरित और सस्ती जांच सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित किए गए थे, लेकिन संचालन ठप होने से मरीजों को अब पैथोलॉजी और निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल अस्पताल में भीड़ बढ़ी है, बल्कि इलाज में देरी और खर्च भी बढ़ रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कोरोना काल के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में दो हेल्थ एटीएम स्थापित किए थे। इन मशीनों के जरिए एक ही स्थान पर कई जरूरी जांचें उपलब्ध कराई जानी थीं, ताकि मरीजों को त्वरित रिपोर्ट मिले और बाहरी लैब पर निर्भरता घटे।
क्या-क्या जांचें होती थीं
हेल्थ एटीएम में हीमोग्लोबिन, सीबीसी, ब्लड शुगर, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, एचसीवी, ब्लड ग्रुप, एचबीए1सी, सीरम यूरिक एसिड, ईएसआर सहित 50 से अधिक जांचें संभव थीं। शुरुआत में दो से तीन साल तक मशीनें नियमित रूप से चलती रहीं और मरीजों को इसका लाभ भी मिला।
संचालन ठप, बढ़ी परेशानी
पिछले एक वर्ष से मशीनें अस्पताल के एक कमरे में बंद पड़ी हैं। जब ये चल रही थीं, तब पैथोलॉजी और निजी लैब में भीड़ कम रहती थी। अब संचालन बंद होने से जांच के लिए मरीजों की लाइनें फिर से लंबी हो गई हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय मरीजों का कहना है कि पहले कम समय और कम खर्च में जांच हो जाती थी। अब निजी लैब की ओर जाना पड़ता है, जिससे जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और रिपोर्ट में भी समय लगता है।
आधिकारिक जानकारी
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून डॉ. मनोज शर्जा ने कहा, “मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों से जानकारी जुटाई जाएगी।”
आगे क्या होगा
मरीजों की मांग है कि हेल्थ एटीएम का संचालन तत्काल बहाल किया जाए और इनके रखरखाव की जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।




