
ऋषिकेश: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उत्तराखंड दौरे के दौरान ऋषिकेश में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब विभिन्न संगठनों से जुड़ी महिलाओं को गीता भवन में आयोजित कल्याण शताब्दी समारोह में जाने से पुलिस ने जानकी झूला पुल के पास रोक दिया। अनुमति न होने के कारण रोकी गई महिलाओं ने गृहमंत्री से मिलने की जिद की, जिस पर पुलिस के साथ उनकी बहस हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने महिलाओं को हिरासत में लेकर ऋषिकेश कोतवाली पहुंचाया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें सुरक्षित घर भेज दिया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
आज गृहमंत्री अमित शाह के आगमन को देखते हुए स्वर्गाश्रम क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। गीता भवन में कल्याण शताब्दी समारोह आयोजित था, जिसके चलते जानकी झूला और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।
घटना का विवरण
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, समारोह के दौरान कई संगठनों से जुड़ी महिलाएं गृहमंत्री से मिलने के उद्देश्य से गीता भवन की ओर बढ़ रही थीं। पुलिस ने उन्हें जानकी झूला पुल के पास रोक दिया और अनुमति न होने की बात कही। महिलाओं ने बताया कि वे क्षेत्र से जुड़ी समस्याएं गृहमंत्री के सामने रखना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने आगे बढ़ने नहीं दिया।
आधिकारिक जानकारी
ऋषिकेश पुलिस के अनुसार सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत बिना पूर्व अनुमति किसी को भी वीवीआईपी कार्यक्रम स्थल तक जाने की अनुमति नहीं थी। एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि महिलाओं के पास गृहमंत्री से मिलने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं थी, इसलिए उन्हें रोका गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी महिलाओं को सकुशल उनके घर भेज दिया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
हिरासत में ली गई महिलाओं का कहना है कि वे उत्तराखंड की आम नागरिक हैं और अपनी समस्याएं लोकतांत्रिक तरीके से रखना चाहती थीं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी बात सुने बिना उन्हें जबरन हिरासत में लिया गया। स्थानीय लोगों ने भी कहा कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन संवाद के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए थी।
महिलाओं की मांगें
महिलाओं के अनुसार वे अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी का नाम उजागर करने और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद वन भूमि पर बसे लोगों के कथित उत्पीड़न जैसे मुद्दों को गृहमंत्री के सामने रखना चाहती थीं, लेकिन कार्यक्रम के दौरान उन्हें यह अवसर नहीं मिल सका।
आगे क्या होगा
पुलिस प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के दौरान संगठनों को पूर्व अनुमति लेकर ही अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। वहीं, महिलाओं से जुड़े संगठनों ने संकेत दिए हैं कि वे अपनी मांगों को प्रशासनिक और संवैधानिक मंचों के माध्यम से आगे भी उठाते रहेंगे।







