
उत्तरकाशी: उत्तरकाशी जिले के रवांई क्षेत्र को पृथक जिला बनाए जाने और पुरोला को जिला मुख्यालय घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। अपनी मांग को लेकर क्षेत्रीय जनता ने आंदोलन का रास्ता अपनाते हुए पुरोला में महापंचायत आयोजित की। रवांई जिला बनाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर कमल गंगा तट खेल मैदान में हुई इस महापंचायत में रामा, कमल सिरांई और मोरी क्षेत्र से बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल हुए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि यह मांग आगे भी अनसुनी रही, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
रवांई क्षेत्र को जिला बनाए जाने की मांग कोई नई नहीं है। संघर्ष समिति के अनुसार राड़ी टॉप से लेकर हिमाचल सीमा से सटे आराकोट-बंगाण तक के इलाकों को शामिल कर पृथक जिला बनाने और पुरोला को उसका मुख्यालय घोषित करने की मांग दशकों से चली आ रही है। महापंचायत का नेतृत्व संघर्ष समिति के संयोजक और कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रकाश कुमार ने किया। बैठक में पृथक जिला निर्माण की जरूरत, इसके सामाजिक और भौगोलिक कारणों पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
महापंचायत के बाद संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी मुकेश रमोला के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में कहा गया कि उत्तरकाशी जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण रवांई घाटी के डामटा, पुरोला, नौगांव और हिमाचल सीमा से लगे मोरी क्षेत्र के लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
महापंचायत में मौजूद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से केवल आश्वासन ही मिलते रहे हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि 2011, 2014, 2016 और 2018 में आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और अनशन के बावजूद मांग पूरी नहीं हुई। वक्ताओं ने कहा कि राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष में भी यदि रवांई को जिला नहीं बनाया गया, तो क्षेत्रीय जनता को दोबारा आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
पहले भी हो चुकी हैं मांग
संघर्ष समिति ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रवांई सहित चार नए जिलों के गठन की घोषणा की थी, लेकिन यह घोषणा अब तक अमल में नहीं आ सकी है। इसी कारण समय-समय पर यह मुद्दा फिर से उठता रहा है।
आगे क्या होगा
संघर्ष समिति का कहना है कि यदि सरकार की ओर से जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। आने वाले दिनों में रणनीति को और धार देने के लिए क्षेत्र स्तर पर बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा।




