
रामनगर: सर्दियों की दस्तक के साथ ही कॉर्बेट नेशनल पार्क और कोसी बैराज के जलाशयों में साइबेरियन प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। हर साल की तरह इस बार भी हजारों किलोमीटर लंबी यात्रा तय कर विदेशी परिंदों ने उत्तराखंड की धरती पर डेरा डाला है। इन परिंदों की चहचहाहट और उड़ानों ने स्थानीय लोगों और सैलानियों दोनों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हर साल अक्टूबर से लेकर मार्च तक साइबेरिया, तिब्बत और हिमालयी ऊँचाई वाले क्षेत्रों से प्रवासी पक्षी उत्तराखंड का रुख करते हैं। रामनगर और कोसी बैराज इन परिंदों के पसंदीदा ठिकानों में से एक हैं। यह वार्षिक प्रवास न सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाता है बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन को भी गति देता है।
विदेशी मेहमानों की आमद
मौसम बदलते ही जैसे-जैसे हवा में ठंडक घुली, वैसे-वैसे प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया। कोसी बैराज और आसपास के जलाशयों में अब हर सुबह सुर्खाब (गोल्डन डक), पिंटेल, गीज़, वॉल कीपर, ब्लैक स्टार्ट और करबोरेंच जैसी दुर्लभ प्रजातियां देखी जा रही हैं। सैलानी और स्थानीय लोग इन पक्षियों के साथ बिताए हर पल को यादगार बना रहे हैं।
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों का आकर्षण केंद्र
रामनगर और कोसी बैराज इन दिनों वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों का नया केंद्र बन गए हैं। फोटोग्राफर दीप राजवार ने बताया,
“सर्द मौसम की शुरुआत के साथ ही ये प्रवासी पक्षी कॉर्बेट लैंडस्केप में पहुंच जाते हैं। इनकी अठखेलियों से पूरा इलाका जीवंत हो उठता है। सुर्खाब पक्षी सबसे आकर्षक होते हैं और इन्हें देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी आते हैं।”
उन्होंने बताया कि सुर्खाब पक्षी जीवन में केवल एक बार जोड़ा बनाते हैं और हमेशा जोड़े में उड़ते हैं। इनकी जोड़ीदार उड़ान पर्यटकों के लिए एक अनोखा दृश्य पेश करती है।
प्रकृति का चमत्कार और पर्यावरण संतुलन
अक्टूबर से नवंबर के बीच आने वाले ये परिंदे सात समुंदर पार करके हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं। वे यहां ठंड के मौसम में विश्राम करते हैं और मार्च में अपने वतन लौट जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रवास न केवल पक्षियों के जीवन चक्र का हिस्सा है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक भी है।
बर्ड वॉचिंग का नया दौर
कोसी घाटी में इन दिनों बर्ड वॉचिंग का उत्सव जैसा माहौल है। सैलानी सुबह की धूप में झीलों पर उड़ते पक्षियों को देखने के लिए उमड़ रहे हैं। स्थानीय गाइड्स का कहना है कि बर्ड वॉचिंग टूरिज्म ने रामनगर की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। यह प्रवास न सिर्फ पर्यटन बल्कि पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी मजबूत करता है।
वन विभाग की निगरानी और अपील
रामनगर वन प्रभाग के एसडीओ अंकित बडोला ने बताया,
“वन विभाग प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए कोसी नदी और आसपास के जलाशयों में सघन निगरानी कर रहा है। रात्रि गश्त और ग्राम समितियों की मदद से शिकार की घटनाओं को रोकने के प्रयास जारी हैं।”
उन्होंने आम जनता और पर्यटकों से अपील की कि वे इन पक्षियों को देखने जरूर आएं, लेकिन इन्हें परेशान या इनके ठिकानों में हस्तक्षेप न करें।
स्थानीय खुशी और सांस्कृतिक जुड़ाव
स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेशी पक्षियों के आगमन से पूरे क्षेत्र का वातावरण बदल जाता है। “इन परिंदों के लौटने से हमारे गांवों में रौनक आ जाती है, यह प्रकृति का उपहार है,” एक निवासी ने कहा।







