
पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इस वर्ष भालू की गतिविधियों और हमलों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। पौड़ी गढ़वाल जिले के पोखड़ा विकासखंड अंतर्गत बस्तांग गांव में हालात इतने भयावह हो गए कि ग्रामीणों को अपने पैतृक घर छोड़ने पड़े। लगातार हो रहे हमलों, मवेशियों की मौत और जान के खतरे के चलते गांव का आखिरी परिवार भी पलायन कर पास के गांव में शरण लेने को मजबूर हुआ। यह स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि इससे न केवल ग्रामीणों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि पहाड़ों में पहले से जारी पलायन की समस्या और गहरी होती जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
आमतौर पर सर्दियों में बर्फबारी और ठंड के कारण भालू शीतनिद्रा में रहता है। लेकिन इस बार बर्फबारी न होने और जंगलों में भोजन की कमी के चलते भालू आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस साल हमलों की संख्या अधिक रही है और कई घटनाओं में मानव जीवन भी प्रभावित हुआ है। जंगलों से सटे गांवों में यह समस्या सबसे ज्यादा गंभीर बनती जा रही है।
घटनाक्रम और प्रभाव
पोखड़ा विकासखंड के बस्तांग गांव में पहले से केवल दो परिवार रह रहे थे। एक परिवार पहले ही कोटद्वार की ओर विस्थापित हो चुका था, जबकि दूसरा परिवार भी गांव खाली कर पास के गांव पणिया में अस्थायी रूप से शरण लेने को मजबूर हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन के समय भी भालू गांव के आसपास देखे जा रहे हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों में डर बना हुआ है और सामान्य जनजीवन ठप पड़ गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पणिया गांव में शरण लिए हरिप्रसाद ने बताया कि जनवरी महीने में केवल तीन दिनों के भीतर भालू ने उनके छह मवेशियों को मार डाला। जान का खतरा और आजीविका पर संकट देखते हुए उन्हें परिवार समेत गांव छोड़ना पड़ा। उनका कहना है कि अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस सहायता नहीं मिली है।
ग्राम प्रधान हर्षपाल सिंह का कहना है कि उनकी ग्रामसभा में भी भालू की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और महिलाएं घास व लकड़ी लेने जंगल जाने से डर रही हैं।
जनप्रतिनिधियों की चिंता
जिला पंचायत सदस्य बलवंत सिंह नेगी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में जीवन यापन पहले ही कठिन है और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक ने हालात और खराब कर दिए हैं। उन्होंने सरकार से शीघ्र ठोस निर्णय लेने की मांग की, ताकि लोग सुरक्षित रूप से अपने गांवों में रह सकें।
आधिकारिक जानकारी
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि बस्तांग गांव में मवेशियों की मौत के मामलों में मुआवजा प्रक्रिया चल रही है। संबंधित रेंजर से रिपोर्ट मांगी गई है और प्रभावित परिवार को शीघ्र मुआवजा दिया जाएगा। भालू को पकड़ने के लिए उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग गश्त बढ़ाए, भालू को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए ठोस योजना बनाए और प्रभावित परिवारों को सुरक्षा व स्थायी समाधान उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि विस्थापित ग्रामीण अपने गांवों में दोबारा लौट पाएंगे या नहीं।




