
रुद्रपुर: कुमाऊं मंडल में विकास के नए आयाम खुलने जा रहे हैं। पंतनगर एयरपोर्ट अब सिर्फ सीमित उड़ानों वाला हवाई अड्डा नहीं रहेगा, बल्कि 793 एकड़ क्षेत्र में विकसित होकर कुमाऊं के आर्थिक, शैक्षणिक और पर्यटन भविष्य का मजबूत आधार बनेगा। आने वाले दो वर्षों में, यानी 2028 तक, पंतनगर एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस आधुनिक हवाई अड्डे के रूप में नई पहचान हासिल करेगा। मौजूदा रनवे को बढ़ाकर 3000 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा किया जाएगा, जिससे बड़े यात्री विमानों का संचालन संभव हो सकेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
अब तक पंतनगर एयरपोर्ट के सीमित रनवे पर छोटे विमानों की आवाजाही होती थी। तराई क्षेत्र में स्थित इस एयरपोर्ट के विस्तार को कुमाऊं के समग्र विकास से जोड़ा जा रहा है। बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से क्षेत्र में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, पहले चरण में 387 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक टर्मिनल भवन का निर्माण किया जा रहा है। 8500 वर्ग मीटर में फैला यह टर्मिनल एक समय में 475 यात्रियों और सालाना 10 लाख से अधिक यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। टर्मिनल में एयर ब्रिज, एस्केलेटर, लिफ्ट, ऑटोमैटिक पार्किंग, फूड कोर्ट, रिटेल शॉप्स और कार रेंटल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय उद्यमियों, व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट के विस्तार से नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा।
आंकड़े और तथ्य
एयरपोर्ट विस्तारीकरण के बाद एप्रन क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। जहां अभी एक समय में केवल दो विमानों की पार्किंग की व्यवस्था है, वहीं विस्तार के बाद पांच विमानों के एक साथ खड़े होने की सुविधा उपलब्ध होगी।
इसके साथ ही पंतनगर एयरपोर्ट से कार्गो सेवाओं की शुरुआत की जाएगी, जिससे कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान और स्थानीय उत्पाद हवाई मार्ग से सीधे बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे।
आगे क्या होगा
एयरपोर्ट निदेशक के अनुसार, पंतनगर एयरपोर्ट कुमाऊं का गेटवे है और इसका विस्तार पूरे उत्तराखंड के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा। राज्य सरकार के सहयोग से सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना तराई से पहाड़ तक विकास की नई रेखा खींचेगी।
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