
बदरीनाथ। नीलकंठ पर्वत ट्रैक पर फंसे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी 18 वर्षीय पर्यटक आर्यन सिंह की जान इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 की समय पर मदद से बचा ली गई। ट्रैकिंग के दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेस कैंप के पास रास्ता भी भटक गया। सूचना मिलने पर पुलिस और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने त्वरित रेस्क्यू अभियान चलाकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
ट्रैकिंग के दौरान बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह प्रयागराज निवासी आर्यन सिंह (उम्र 18 वर्ष, पुत्र सुनील सिंह) नीलकंठ पर्वत ट्रैक पर गया था। ट्रैकिंग के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह रास्ता भटककर बेस कैंप के पास फंस गया।
उसने तुरंत इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल कर अपनी स्थिति बताई। कॉल मिलते ही कंट्रोल रूम ने बदरीनाथ थाना पुलिस और एसडीआरएफ टीम को सूचना दी।
पुलिस और SDRF का त्वरित रेस्क्यू अभियान
सूचना पर हेड कांस्टेबल लक्ष्मण, कांस्टेबल सरदार और एसडीआरएफ के जवानों की टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हुई।
कठिन ट्रैकिंग क्षेत्र पार करते हुए जब टीम आर्यन तक पहुंची, तो वह गंभीर हालत में पाया गया।
हेड कांस्टेबल लक्ष्मण सिंह ने बताया —
“आर्यन को ऊंचाई के कारण ऑक्सीजन की कमी हो रही थी। हमने तुरंत पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर से उसे ऑक्सीजन दी, जिससे उसकी हालत स्थिर हुई।”
रेस्क्यू टीम ने युवक को सुरक्षित नीचे लाकर थाना बदरीनाथ पहुंचाया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया।
पुलिस अधीक्षक की अपील
पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने घटना के बाद पर्यटकों से अपील की कि —
“पर्वतीय और दुर्गम ट्रैकिंग मार्गों पर जाने से पहले पर्यटक आवश्यक सुरक्षा उपकरण, मेडिकल किट और स्थानीय गाइड साथ रखें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और मौसम परिवर्तन के खतरे को कभी न नजरअंदाज करें।”
उन्होंने कहा कि 112 हेल्पलाइन की तत्परता और पुलिस-एसडीआरएफ के संयुक्त प्रयास से यह रेस्क्यू सफल और समय पर हो सका।
स्थानीय प्रशासन की चेतावनी
प्रशासन ने पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग करने वाले सभी पर्यटकों को सलाह दी है कि वे सोलो ट्रैकिंग से बचें और हमेशा मौसम पूर्वानुमान की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करें। साथ ही, नीलकंठ क्षेत्र के ट्रैक को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां गाइड के बिना ट्रैकिंग खतरनाक साबित हो सकती है।







