
देहरादून: श्रीनंदा देवी राजजात की तिथि को लेकर लंबे समय से बना संशय आखिरकार समाप्त हो गया है। नंदा देवी मंदिर, नौटी में वसंत पंचमी के अवसर पर राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर ने घोषणा की कि हिमालीय सचल महाकुंभ मानी जाने वाली श्रीनंदा देवी राजजात वर्ष 2027 में आयोजित की जाएगी। 2027 की वसंत पंचमी को राजजात का दिनपट्टा जारी होगा। इस दौरान प्रशासनिक तैयारियों के लिए सरकार से एक वर्ष का समय देने की मांग भी रखी गई। कार्यक्रम में चमोली के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी मौजूद रहे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हिमालीय सचल महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात हर 12 वर्ष में आयोजित करने की परंपरा है। पिछले दो वर्षों से इसकी तैयारियां चल रही थीं, लेकिन व्यवस्थाओं के अभाव और मलमास के कारण यात्रा को इस वर्ष स्थगित किया गया था। तब राजजात समिति ने वसंत पंचमी के अवसर पर मनौती के बाद तिथि घोषित करने का निर्णय लिया था।
नौटी में हुई तिथि की घोषणा
बृहस्पतिवार शाम कांसुवा से मनौती की छंतोली लेकर राजकुंवर नौटी पहुंचे। वसंत पंचमी के दिन सुबह से मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान हुए। दोपहर बाद मंदिर परिसर में राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि श्रीनंदा देवी राजजात 2027 में होगी। इसके बाद छंतोली शैलेश्वर मंदिर के लिए रवाना हुई।
मनौती में ही होती है राजजात की घोषणा
श्रीनंदा देवी राजजात समिति नौटी के सचिव भुवन नौटियाल ने बताया कि वर्ष 2026 में राजजात केवल प्रस्तावित थी। परंपरा के अनुसार राजजात की घोषणा मनौती में ही की जाती है। वर्ष 2024 में पहला अनुष्ठान मौडवी में हुआ और अब दूसरा अनुष्ठान मनौती का चल रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार 2027 में राजजात करने का निर्णय लिया गया है और उसी वर्ष वसंत पंचमी को दिनपट्टा कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
कांसुवा से नौटी तक मनौती की छंतोली यात्रा
राजकुंवरों के गांव कांसुवा से पंचांग पूजा के बाद राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर सहित अन्य राजकुंवरों के हाथों मुख्य पूजा संपन्न हुई। मंत्रोच्चारण के साथ देवी-देवताओं का आह्वान किया गया और पश्वाओं ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद ढोल-दमाऊं और मंगल गीतों के साथ मनौती की छंतोली पैदल नौटी के लिए रवाना हुई। पय्यां, रिठोली, बनोला, मलेठी, ऐरोली और बैनोली में ग्रामीणों ने यात्रा का स्वागत किया। शाम को नौटी मंदिर में छंतोली का भव्य स्वागत हुआ।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झूमे श्रद्धालु
बुधवार रात्रि कांसुवा गांव में सांस्कृतिक संध्या आयोजित हुई। लोकगायक दर्शन फर्स्वाण के गीत “हे नंदा, हे गौरा, कैलाशों की यात्रा…” पर श्रद्धालु झूम उठे। महिला मंगल दल ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर नंदा राजजात पर लिखी पुस्तक और एक चित्र कलाकारों को भेंट किए गए।
नंदा की बड़ी जात पर आज होगा फैसला
वसंत पंचमी के अवसर पर मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर परिसर में नंदा की बड़ी जात के आयोजन पर निर्णय लिया जाएगा। मंदिर में विशेष पूजाएं होंगी और दिनपट्टा महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर समिति के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में विशेष पूजन के बाद मां नंदा का आह्वान किया जाएगा और माता के आदेश के अनुसार आगे के कार्यक्रम तय होंगे।
आगे क्या होगा
राजजात 2027 की घोषणा के साथ ही प्रशासनिक और व्यवस्थागत तैयारियों को समयबद्ध रूप से पूरा करने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार से अपेक्षा है कि एक वर्ष के भीतर आवश्यक सुविधाएं और व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुचारु यात्रा का अनुभव मिल सके।







