
नैनीताल में देर रात उस समय खलबली मच गई जब चाइना पीक घूमने आया 12वीं का छात्र जंगल में लापता हो गया। रुद्रपुर निवासी जयस कार्की अपने पांच दोस्तों के साथ शाम के समय ट्रेक पर निकला था, लेकिन रास्ता भटकने के बाद वह घने जंगल में फंस गया। रातभर चले सर्च ऑपरेशन के बाद छात्र को सुबह सुरक्षित ढूंढ लिया गया। वह घायल हालत में मिला और उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
नैनीताल के आसपास के ट्रेकिंग मार्ग युवाओं और पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन यहां रास्ते घने जंगलों, ढलानों और संकरे ट्रेल्स से होकर गुजरते हैं। बिना गाइड, ईयरफोन लगाने या समूह से अलग होकर जाने पर कई बार लोग रास्ता भटक जाते हैं। इसी तरह की एक घटना मंगलवार देर शाम चाइना पीक ट्रेक पर सामने आई।
अधिकारिक जानकारी
जयस कार्की और उसके पांच साथी शहर घूमने के बाद ट्रेकिंग के लिए दो समूहों में बंटकर निकले थे। चार दोस्त चाइना पीक की ओर और दो कैमल्स बैक की ओर गए। नीचे लौटते समय जयस ईयरफोन लगाकर चल रहा था और कुछ ही देर में समूह से अलग हो गया। जब वह प्रवेश द्वार तक नहीं पहुंचा और फोन भी रिसीव नहीं हुआ तो उसके दोस्तों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस, वन विभाग और एसडीआरएफ की टीम ने रातभर सर्च अभियान चलाया।
नयना रेंज के वन क्षेत्राधिकारी ललित कार्की ने बताया कि छह छात्रों में से चार सुरक्षित लौट आए थे, जबकि दो रास्ता भटक गए। उनमें से एक खुद बाहर निकल आया, लेकिन जयस गहरे जंगल की तरफ बढ़ गया था और खाई में गिरने से घायल हो गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और ट्रेकिंग गाइड्स ने बताया कि चाइना पीक का मार्ग रात के समय बेहद जोखिम भरा हो जाता है, खासकर तब जब कोई अकेले चलने की कोशिश करे। कई लोगों ने कहा कि ईयरफोन लगाकर चलना आवाज़ों और आसपास की हलचल को पकड़ने की क्षमता को कम कर देता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
रेस्क्यू अभियान और स्वास्थ्य स्थिति
रात तीन बजे तक खोज जारी रही, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद सुबह पांच बजे ऑपरेशन पुनः शुरू किया गया। वन विभाग, पुलिस और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने घने पेड़ों और तीखी ढलानों के बीच जांच जारी रखी। करीब 11 बजे टीम को छात्र जंगल के भीतर घायल अवस्था में मिला। वह पूरी रात ठंड और अंधेरे में फंसा हुआ था और काफी मानसिक दबाव में भी था।
उसे तुरंत जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसके पांव में गंभीर चोट है, जिसके चलते उसे हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
आगे क्या
इस घटना के बाद प्रशासन ने युवाओं और पर्यटकों से अपील की है कि ट्रेकिंग हमेशा समूह में, स्थानीय गाइड की मदद से और बिना ईयरफोन लगाए की जाए। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इन ट्रेकिंग मार्गों पर चेतावनी संकेत और सुरक्षा गश्त बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।







