
रुद्रप्रयाग (केदारनाथ धाम): दिसंबर माह का आधा से अधिक समय बीत जाने के बावजूद केदारनाथ धाम में अब तक बर्फबारी नहीं हुई है, जिससे मौसम का बदला हुआ मिजाज साफ नजर आ रहा है। आमतौर पर इस समय तक धाम में कई फीट बर्फ जम जाती है और सभी गतिविधियां ठप हो जाती हैं, लेकिन इस वर्ष नवंबर के बाद से बर्फ नहीं गिरी है। बर्फ न होने के कारण केदारनाथ में द्वितीय चरण के पुनर्निर्माण कार्य लगातार जारी हैं। हालांकि, कड़ाके की ठंड के चलते मजदूर सीमित समय तक ही काम कर पा रहे हैं और सीमेंट से जुड़े कार्य फिलहाल बंद हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले वर्षों में दिसंबर के मध्य तक केदारनाथ धाम और आसपास की चोटियों पर पांच फीट से अधिक बर्फ जमा हो जाती थी। बर्फबारी के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह बंद हो जाते थे और धाम में आवाजाही सीमित रहती थी। इस बार नवंबर में अंतिम बर्फबारी के बाद मौसम साफ बना हुआ है, जिससे यह स्थिति असामान्य मानी जा रही है।
आधिकारिक जानकारी
लोनिवि गुप्तकाशी के अधिशासी अभियंता राजविंद सिंह ने बताया कि केदारनाथ धाम में रात के समय तापमान माइनस दस डिग्री सेल्सियस तक जा रहा है। ठंड के चलते सीमेंट से संबंधित कार्य नहीं किए जा पा रहे हैं, लेकिन पेयजल और बिजली लाइन के अंडरग्राउंड कार्य जारी हैं। उन्होंने बताया कि धाम में करीब 150 मजदूर कार्यरत हैं, जो प्रतिदिन 5 से 6 घंटे तक ही काम कर पा रहे हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
धाम में कार्य कर रहे श्रमिकों का कहना है कि बर्फ न होने के बावजूद ठंड बेहद तीखी है। सुबह करीब दस बजे के बाद ही धूप निकलती है, जिससे कुछ राहत मिलती है। मजदूरों के अनुसार, खुले वातावरण में काम करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, लेकिन कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।
आंकड़े / तथ्य
केदारनाथ धाम में इस समय लगभग 150 मजदूर पुनर्निर्माण कार्यों में लगे हैं। रामबाड़ा–गरुड़चट्टी पैदल मार्ग के पुनर्निर्माण में करीब 80 श्रमिक कार्य कर रहे हैं। अंतिम बर्फबारी 20 नवंबर को हुई थी, जिसके बाद से दिसंबर में अब तक बर्फ नहीं गिरी है।
आगे क्या होगा
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि मौसम साफ रहने तक केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य जारी रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के दौरान आए विशालकाय बोल्डरों पर देवी-देवताओं और पौराणिक आकृतियों की कलाकृतियां उकेरी जा रही हैं, जो आगामी यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि 2026 की यात्रा से पहले पुराने पैदल मार्ग सहित सभी प्रमुख कार्य पूरे कर लिए जाएं।







