
देहरादून में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय की ओर कूच किया, लेकिन पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद नाराज कांग्रेसी सड़क पर धरने पर बैठ गए और सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जब किसान ने अपने वीडियो संदेश में पुलिस अधिकारियों के नाम लिए हैं, तो वही पुलिस निष्पक्ष जांच कैसे कर सकती है। यह मामला केवल एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवालों से जुड़ा बताया जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
काशीपुर में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद से प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मृतक किसान ने आत्महत्या से पहले जारी अपने बयान में कुछ लोगों और पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसी को आधार बनाकर विपक्ष लगातार उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। इससे पहले भी प्रदेश में पुलिस पर कथित दबाव और पक्षपात के आरोपों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरता रहा है।
आधिकारिक जानकारी
पुलिस ने प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकते हुए सुभाष रोड पर ही बैरिकेडिंग कर दी। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया। हालांकि, इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।
अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसान की मौत ने आम जनता को झकझोर दिया है और निष्पक्ष जांच जरूरी है। कुछ लोगों ने बताया कि यदि आरोप सही हैं तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
नेताओं के बयान
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि जब आरोप पुलिस पर ही हैं, तो जांच में निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उन्हें जांच से अलग रखा जाए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने कहा कि उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान ने अपनी मौत के लिए कुछ लोगों और उधम सिंह नगर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनके अनुसार, किसान के मौत से पहले दिए गए बयान के आधार पर तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी।
संख्या / तथ्य
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता शामिल रहे। पुलिस द्वारा कुछ कर्मियों को निलंबित और लाइन हाजिर किया गया है, लेकिन विपक्ष इसे अपर्याप्त बता रहा है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने साफ किया है कि यदि इस मामले में एसएसपी, थाना अध्यक्ष और अन्य नामजद पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई और उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं, सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।






