
ऋषिकेश: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गीता प्रेस से प्रकाशित कल्याण पत्रिका पिछले सौ वर्षों से भारतीय समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिकता, सदाचार और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य कर रही है। स्वर्गाश्रम स्थित गीता भवन में आयोजित कल्याण शताब्दी समारोह में शामिल होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पत्रिका केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दृष्टि को दिशा देने वाला आंदोलन रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गीता प्रेस की स्थापना वर्ष 1923 में हुई थी और तब से यह संस्था भारतीय सनातन संस्कृति, धर्मग्रंथों और ज्ञान परंपरा के संरक्षण व प्रसार में निरंतर सक्रिय रही है। कल्याण पत्रिका का शताब्दी वर्ष इस दीर्घकालिक सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वैचारिक भ्रम फैलाने के प्रयास हो रहे थे, उस दौर में गीता प्रेस ने श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस, उपनिषदों और पुराणों जैसे महान ग्रंथों का प्रकाशन कर भारतीय जनमानस को जागृत किया। उन्होंने बताया कि गीता प्रेस ने स्थापना से अब तक 101 करोड़ से अधिक धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन कर संस्कृति और ज्ञान परंपरा को संजोया है।
कल्याण शताब्दी समारोह
समारोह में कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कर-कमलों द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे समूचे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक चेतना के निरंतर प्रवाह का प्रतीक है।
केंद्र सरकार की नीतियों पर मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि केंद्र सरकार आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज देश में विघटनकारी शक्तियां सिर उठाने का साहस नहीं कर पा रही हैं और सहकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं और साधकों ने कहा कि कल्याण पत्रिका और गीता प्रेस का कार्य नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनका मानना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आने वाले समय में सांस्कृतिक संरक्षण और आध्यात्मिक गतिविधियों को और गति देने की दिशा में पहल जारी रहेगी।







