
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के दून अस्पताल पहुंचकर कालसी क्षेत्र में हुए हिमाचल रोडवेज बस हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि सभी घायलों का उपचार प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और किसी भी तरह की कमी न रहे। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि हादसे में बड़ी संख्या में यात्री घायल हुए हैं और कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के चौपाल से पांवटा साहिब आ रही हिमाचल रोडवेज की बस हरिपुर-कोटी-क्वानू-मीनस राजमार्ग पर सुदोई खड्ड के पास करीब 100 मीटर गहरी खाई में गिर गई। बताया गया कि बस, कालसी की ओर से आ रहे एक ट्रक को पास देने के दौरान सड़क का पुश्ता ढहने से अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। बस में कुल 36 यात्री सवार थे। हादसे में शिमला जिले के नेरवा निवासी यासमीन (38), क्यूमला निवासी धन बहादुर (50) और बिजमल गांव की रिया (28) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 33 यात्री घायल हो गए। बस चालक दिनेश कुमार की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हादसे की सूचना मंगलवार सुबह करीब 10 बजे मिलते ही तहसील प्रशासन सक्रिय हुआ। नायब तहसीलदार राजेंद्र लाल मौके पर पहुंचे और एसडीआरएफ की टीम ने राहत एवं बचाव कार्य संभाला। अधिकारियों ने बताया कि घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए। बाद में एडीएम वित्त केके मिश्रा, एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार, एसडीएम पांवटा साहिब गुंजित सिंह चीमा, डीएसपी पांवटा मानवेंद्र ठाकुर और तहसीलदार विवेक राजौरी भी अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों को समुचित उपचार के निर्देश दिए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि एंबुलेंस देर से पहुंचने के कारण उन्होंने निजी और यात्री वाहनों से घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। लोगों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर त्वरित सहयोग से कई घायलों को समय पर इलाज मिल सका।
आंकड़े और तथ्य
हादसे में तीन लोगों की मौत हुई है और 33 यात्री घायल हैं। घायलों में से 14 को उप जिला अस्पताल, 10 को हरबर्टपुर स्थित लेहमन अस्पताल, तीन को पांवटा साहिब के सरकारी अस्पताल और एक को धूलकोट स्थित ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार घायलों को हायर सेंटर रेफर किया गया है।
आगे क्या होगा
प्रशासन के अनुसार, गंभीर घायलों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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