
देहरादून: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की को कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के तहत ‘संचय’ नामक शिल्प आधारित संसाधन केंद्र स्थापित करने की स्वीकृति मिल गई है। यह केंद्र आईआईटी रुड़की के ऐतिहासिक परिसर में विकसित किया जाएगा, जहां भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं को आधुनिक प्रौद्योगिकी, डिज़ाइन और नवाचार के साथ जोड़ा जाएगा। इस पहल से विशेष रूप से उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों की पारंपरिक व संकटग्रस्त शिल्प विधाओं के संरक्षण और शिल्पकारों के सशक्तिकरण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
भारत की हस्तशिल्प परंपराएं सदियों पुरानी हैं, लेकिन बदलते समय, सीमित बाज़ार पहुंच और तकनीकी अभाव के कारण कई शिल्प विधाएं संकट में हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे संसाधन केंद्रों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो शिल्प, डिज़ाइन और तकनीक के बीच सेतु बन सकें। ‘संचय’ इसी जरूरत का परिणाम माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
यह केंद्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में स्थापित किया जाएगा और इसे कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय का समर्थन प्राप्त होगा। ‘संचय’ का उद्देश्य भारत की विविध शिल्प परंपराओं का संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास सुनिश्चित करना है।
‘संचय’ का उद्देश्य और संरचना
‘संचय’ को एक राष्ट्रीय शिल्प केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में इसका फोकस उत्तराखंड सहित हिमालयी राज्यों पर रहेगा। केंद्र के माध्यम से पारंपरिक और संकटग्रस्त शिल्पों के पुनरुद्धार के लिए संरचित प्रशिक्षण, डिज़ाइन विकास, डिजिटल प्रलेखन और आधुनिक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इससे शिल्पकार समुदायों को आजीविका के नए अवसर मिलेंगे।
डिज़ाइन विभाग करेगा नेतृत्व
इस पहल का नेतृत्व आईआईटी रुड़की के डिज़ाइन विभाग द्वारा किया जा रहा है। विभागाध्यक्ष अपूर्वा कुमार शर्मा के साथ समन्वयक स्मृति सरस्वत और अन्य शिक्षाविद् इस परियोजना से जुड़े हैं। शोधार्थियों की टीम भी तकनीकी और प्रलेखन कार्य में सहयोग करेगी।
आधुनिक सुविधाओं से होगा लैस केंद्र
‘संचय’ में प्रौद्योगिकी-सक्षम कार्यस्थल, डिज़ाइन व प्रदर्शनी स्टूडियो, मेकर लैब्स और डिजिटल अभिलेखागार स्थापित किए जाएंगे। एक व्यापक शिल्प विश्वकोश और शिल्पकार निर्देशिका भी विकसित की जाएगी, जिसे ओएनडीसी और मेक इन इंडिया जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
वैश्विक स्तर पर शिल्प कूटनीति को बल
क्षेत्रीय फोकस से आगे बढ़ते हुए यह केंद्र भारत की वैश्विक शिल्प कूटनीति में भी योगदान देगा। सतत आजीविका को समर्थन, सांस्कृतिक संरक्षण, डिज़ाइन सोच और रचनात्मक उद्योगों के लिए नए अवसर सृजित करना इसके प्रमुख लक्ष्य हैं।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
आईआईटी रुड़की के निदेशक केके पंत ने कहा कि ‘संचय’ भारत की शिल्प विरासत को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़ने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) ने इसे शिल्प संरक्षण और नवाचार के लिए एक दूरदर्शी मॉडल बताया।
आगे क्या होगा
आने वाले चरणों में केंद्र के बुनियादी ढांचे के विकास के साथ प्रशिक्षण और शोध गतिविधियां शुरू की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘संचय’ शिल्प संरक्षण, कौशल विकास और सांस्कृतिक नवाचार के लिए एक मार्गदर्शक संस्थान के रूप में उभरेगा।







