
रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों ने मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक अगली पीढ़ी का एंटीबॉडी खोज मंच विकसित किया है, जो संक्रामक रोगों, कैंसर, स्वप्रतिरक्षा विकारों और उभरते रोग जनकों के निदान व उपचार को नई दिशा दे सकता है। यह पहल न केवल किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने में सहायक होगी, बल्कि महामारी की तैयारी और स्वदेशी जैव प्रौद्योगिकी नवाचार को भी मजबूत करेगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
वैश्विक स्तर पर समय पर और किफायती स्वास्थ्य समाधान आज भी एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं, खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में। कोविड-19 जैसी महामारियों के अनुभव के बाद तेज़ और भरोसेमंद निदान व उपचार प्रणालियों की आवश्यकता और अधिक महसूस की जा रही है। इसी संदर्भ में आईआईटी रुड़की का यह शोध महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
इस शोध का नेतृत्व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के जैव विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर राजेश कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि यह मंच एक उच्च विविधता वाली सिंगल डोमेन एंटीबॉडी (नैनो बॉडी) लाइब्रेरी पर आधारित है, जो विभिन्न बीमारियों के खिलाफ स्थिर और उच्च आसक्ति एंटीबॉडी की तेज पहचान को संभव बनाता है।
अनुसंधान की खासियत
यह एंटीबॉडी खोज मंच संक्रामक रोग, कैंसर, ऑटोइम्यून विकार और उभरते रोगजनकों जैसे व्यापक लक्ष्यों के लिए उपयोगी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे बीमारी की पहचान और उपचार प्रक्रिया को तेज़, सटीक और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
वैश्विक लक्ष्यों से जुड़ाव
प्रोफेसर राजेश कुमार के अनुसार यह शोध संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों से भी जुड़ा है, विशेष रूप से एसडीजी-3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), एसडीजी-9 (उद्योग, नवाचार और अवसंरचना) और एसडीजी-17 (लक्ष्यों के लिए साझेदारियां) से। इससे खासतौर पर उन देशों को लाभ मिलेगा, जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आज भी सीमित है।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल
यह पहल आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप है। स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत कर यह आयातित जैविक उत्पादों पर निर्भरता कम करेगी और देश में बौद्धिक संपदा के सृजन को बढ़ावा देगी।
उद्योग–अकादमिक सहयोग
वास्तविक दुनिया में इस तकनीक के उपयोग को तेज़ करने के लिए आईआईटी रुड़की ने आईएमजीनएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग के तहत एंटीबॉडी अभियांत्रिकी, निदान, उपचार और जैव प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और क्षमता निर्माण किया जाएगा।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
आईआईटी रुड़की के निदेशक केके पंत ने कहा कि यह विकास दर्शाता है कि मौलिक अनुसंधान और उद्योग सहयोग मिलकर समाज की तात्कालिक चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। वहीं, उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि यह सहयोग अगली पीढ़ी की एंटीबॉडी तकनीकों को किफायती स्वास्थ्य समाधानों में बदलने में मदद करेगा।
आगे क्या होगा
संस्थान का लक्ष्य इस तकनीक को प्रयोगशाला से आगे बढ़ाकर वास्तविक चिकित्सा उपयोग में लाना है। आने वाले समय में इसके माध्यम से नई जांच किट, उपचार पद्धतियां और जैविक उत्पाद विकसित किए जाने की संभावना है, जिससे देश और दुनिया को लाभ मिल सकेगा।







