
मसूरी: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने मसूरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्रशासनिक फैसले अधिकारियों के विवेक से नहीं बल्कि भाजपा के विवेक से लिए जा रहे हैं। हरीश रावत ने भाजपा को पूंजीपतियों की पार्टी बताते हुए कहा कि उसने कभी गरीबों, बेरोजगारों और आम जनता के हित में गंभीरता से नहीं सोचा। उनके इस बयान से प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है और आगामी दिनों में सियासी टकराव तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में हाल के महीनों में प्रशासनिक निर्णयों, रोजगार और संसाधनों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेताओं द्वारा सरकार पर आम जनता की अनदेखी और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। मसूरी में दिया गया हरीश रावत का यह बयान इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच तल्खी बढ़ा दी है।
आधिकारिक जानकारी
हरीश रावत ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा के लोग “रावण के भी रावण” हैं और अहंकार के साथ राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने लोकतंत्र की विडंबना का जिक्र करते हुए कहा कि आज किसी को रोजगार मिलता है तो किसी का रोजगार छिन जाता है। इसी क्रम में उन्होंने लोकतंत्र के देवता से प्रार्थना करते हुए कहा कि जैसे आज देश और राज्य का युवा बेरोजगार है, वैसे ही आने वाले समय में जनता भाजपा को भी “बेरोजगार” बना दे।
इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के बयानों से प्रदेश की राजनीति और गरमा जाती है। कुछ लोगों ने इसे विपक्ष की आवाज बताया, जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे तीखे शब्दों से राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है।
मनरेगा को लेकर आरोप
हरीश रावत ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को लेकर भी भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा मनरेगा का नाम बदलने और उसकी आत्मा खत्म करने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार यह योजना रोजगार की एक “कानूनी क्रांति” थी, जिसकी आत्मा ग्राम विकास थी और जिसमें सीधा पैसा गांव तक पहुंचता था। भाजपा ने इस पूरी व्यवस्था को कमजोर कर दिया है।
राम और गांधी पर बयान
हरीश रावत ने कहा कि भगवान राम और महात्मा गांधी को अलग नहीं किया जा सकता। गांधीजी भगवान राम के सबसे बड़े भक्त थे और उन्होंने जीवन के अंतिम क्षणों में भी “हे राम” कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महात्मा गांधी के नाम और विचारधारा को खत्म करने का षड्यंत्र रच रही है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आगे क्या होगा
हरीश रावत के इन तीखे और भावनात्मक बयानों से उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में मनरेगा, रोजगार और राज्य के संसाधनों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी घमासान और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।







