
देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से जुड़े एक एआई जनरेटेड वीडियो को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मंगलवार को हरीश रावत नेहरू कॉलोनी थाने में इस वीडियो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने जा रहे हैं, इसके बाद वह साइबर क्राइम थाने भी पहुंचेंगे। हरीश रावत ने आरोप लगाया है कि एआई का आपराधिक दुरुपयोग कर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में चुनावी वर्ष से पहले सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़ते जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए तैयार किए गए कंटेंट को लेकर विश्वसनीयता और दुरुपयोग के सवाल पहले से उठते रहे हैं। इसी क्रम में यह विवाद सामने आया है, जिसने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
आरोप क्या हैं
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एआई वीडियो पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें एक वीडियो में पाकिस्तानी जासूस के रूप में चित्रित किया गया है। उन्होंने इसे झूठ, फरेब और चरित्र हनन का प्रयास बताया और कहा कि यह पूरी तरह आपराधिक कृत्य है।
आधिकारिक कदम
हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि वह मंगलवार को नेहरू कॉलोनी थाने पहुंचकर एआई वीडियो के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे। इसके बाद वह साइबर क्राइम थाने में भी शिकायत देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 24 दिसंबर को वह एसपी कार्यालय तथा जिले के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी कार्यालय में भी इस मामले को लेकर आवेदन देंगे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यह वीडियो भाजपा की सोच की गिरावट को दर्शाता है। उनका कहना है कि जनता के वास्तविक सवालों पर राजनीति करने के बजाय झूठ और फरेब का सहारा लिया जा रहा है।
हरीश रावत का बयान
हरीश रावत ने कहा कि वह कर्मनिष्ठ और धर्मनिष्ठ हिंदू हैं और सभी का सम्मान करते हैं। उन्होंने धार्मिक अंधता और असहिष्णु कट्टरता को समाज और देश के लिए घातक बताया। उनका कहना है कि इसी सोच के चलते उनके खिलाफ एआई का दुरुपयोग किया गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनाव से पहले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाली सियासी लड़ाई की झलक है। आम लोगों के बीच भी एआई के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई जा रही है।
आगे क्या होगा
एफआईआर और साइबर शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू होगी। जांच के दायरे में वीडियो के स्रोत, प्रसार और जिम्मेदार लोगों की पहचान शामिल होगी। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।







