
हल्द्वानी — रेलवे बनाम बनभूलपुरा भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई टल गई है। अब अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। इस केस को महत्वपूर्ण मोड़ मानते हुए जिले में आज सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई थी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण को लेकर वर्षों से विवाद जारी है। यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट, रेलवे विभाग और हजारों प्रभावित परिवारों के बीच कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट में भी यह मामला लगातार सुनवाई में है और हर तारीख पर पूरे क्षेत्र, प्रभावित परिवारों और प्रशासन की नजरें टिकी रहती हैं।
आज की सुनवाई क्यों टली?
2 दिसंबर की सुनवाई केस के लिए अहम मानी जा रही थी, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते सुनवाई आगे बढ़ गई और अगली तारीख 10 दिसंबर निर्धारित की गई। फैसले का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए यह दिन बेहद संवेदनशील था।
हल्द्वानी में सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त
सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले से पहले हल्द्वानी जिला प्रशासन और पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट रही। बनभूलपुरा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। इसके साथ ITBP और SSB को भी रिज़र्व में रखा गया था।
सड़क मार्गों पर हर आने–जाने वाले वाहन की चेकिंग की गई। शहर के अंदर और बाहरी इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई, जबकि मुख्य स्थानों पर ड्रोन से भी नजर रखी गई।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
14 नवंबर की सुनवाई में रेलवे, राज्य सरकार और प्रभावित परिवारों की दलीलें कोर्ट ने सुनी थीं। रेलवे ने कहा था कि परियोजना के लिए करीब 30 हेक्टेयर भूमि आवश्यक है और अतिक्रमण जल्द हटाया जाना चाहिए।
वहीं परिवारों की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया था कि रिटेनिंग वॉल का निर्माण हो चुका है, जिससे रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को किसी तरह का खतरा नहीं है, और भूमि की मांग पहले इस रूप में नहीं रखी गई थी।
रेलवे की अधिवक्ता ऐश्वर्या भाटी ने इन दलीलों का विरोध किया था। सुनवाई के बाद अदालत ने आज की तारीख तय की थी, जो अब टलकर 10 दिसंबर हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट का अब तक का रुख
सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि रेल लाइन के पास रह रहे लगभग 4365 परिवारों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक भूमि की पहचान कर रेलवे और केंद्र सरकार के साथ संयुक्त बैठकों के जरिए समाधान निकाला जाए।
पूरा मामला कैसे शुरू हुआ?
इस केस की शुरुआत 2013 में हुई, जब उत्तराखंड हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि रेलवे स्टेशन के पास गौला नदी में अवैध खनन हो रहा है और इसी कारण 2004 में पुल ढह गया था।
इस पर हाईकोर्ट ने रेलवे से जवाब मांगा। रेलवे ने 1959 का नोटिफिकेशन, 1971 का रेवेन्यू रिकॉर्ड और 2017 का सर्वे प्रस्तुत कर कहा कि बनभूलपुरा का विवादित क्षेत्र रेलवे संपत्ति है और यहां अतिक्रमण हुआ है।
लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रेलवे की दलीलें मानते हुए भूमि को अतिक्रमित घोषित कर दिया और क्षेत्र खाली कराने का आदेश दिया।
इसके बाद प्रभावित परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां मामला अभी भी विचाराधीन है और स्टे लागू है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
हल्द्वानी में आज दिनभर लोग सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए थे। कुछ लोगों को उम्मीद थी कि आज कोई बड़ा फैसला आएगा, जबकि कई प्रभावित परिवारों ने कहा कि अनिश्चितता का माहौल उन्हें लगातार मानसिक तनाव दे रहा है।
आगे क्या?
अब मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। प्रशासन ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी। अदालत की अगली कार्रवाई पर ही मामले की अगली दिशा तय होगी।






