
पिथौरागढ़ जिले के सीमांत गंगोलीहाट क्षेत्र में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। चमलेख राजस्व ग्राम और आसपास के तोकों में आज भी न तो पेयजल टैंक बने हैं और न ही पाइपलाइन बिछाई गई है, जिससे करीब 90 परिवार गाड़-गदेरों के पानी पर निर्भर हैं। अधूरी पड़ी बेलपट्टी पेयजल पंपिंग योजना ग्रामीणों में नाराजगी की बड़ी वजह बनी हुई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गंगोलीहाट क्षेत्र लंबे समय से पेयजल संकट का सामना कर रहा है। यह पहाड़ी इलाका गर्मियों में पानी की कमी से सबसे अधिक प्रभावित रहता है। जल जीवन मिशन और स्थानीय पेयजल योजनाओं के तहत कई गांवों को लाभ पहुंचाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कार्य की धीमी गति से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।
पेयजल योजना की स्थिति
बेलपट्टी क्षेत्र के 49 राजस्व गांवों की लगभग 25 हजार आबादी के लिए बेलपट्टी पेयजल पंपिंग योजना वर्ष 2022 में शुरू की गई थी।
- कुल लागत: ₹47.50 लाख
- कार्य पूरा करने की पहली समय सीमा: दिसंबर 2024
- संशोधित समय सीमा: दिसंबर 2025
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कोई ठोस कार्य जमीन पर नहीं दिखा। विशेष रूप से चमलेख और उसके तोक—मालटाना, कोलिया, तल्ली कोलिया, भिलाइ, सिमोली, गौताड़ और गाड़—आज भी पेयजल सप्लाई से वंचित हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीण दान सिंह ने कहा: “बेलपट्टी पेयजल योजना से चमलेख और आसपास के तोक बाहर कर दिए गए हैं। पिछले वर्ष जिलाधिकारी और विधायक से शिकायत की थी, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ। ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।”
ग्रामीणों का कहना है कि यदि 15 फरवरी 2025 तक काम शुरू नहीं किया गया, तो गांव के लोग आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
मोहन सिंह ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत भी कोई कार्य नहीं हुआ, जिससे गर्मियों में पानी का संकट और बढ़ने की आशंका है।
अधिकारियों का बयान
पेयजल निगम के अवर अभियंता रवि सामंत ने बताया: “बेलपट्टी पंपिंग योजना में चमलेख गांव और उसके तोक शामिल हैं। टैंक निर्माण और पाइपलाइन बिछाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट पास होते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।”
वहीं स्थानीय विधायक फकीर राम टम्टा ने कहा कि: “जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। नियमों के तहत कार्य नहीं हुआ है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।”
इतिहास: आंदोलन और मुकदमा
तीन वर्ष पहले उडियारी गांव के ग्रामीणों ने पानी की मांग को लेकर धरना और चक्का जाम किया था, जिसके चलते लगभग 60 ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि ग्रामीणों के उग्र आंदोलन के बाद मामले को वापस ले लिया गया, लेकिन आज भी उडियारी और आसपास के गांव पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
आगे क्या?
ग्रामीण प्रशासन से तत्काल पेयजल योजना को गति देने की मांग कर रहे हैं। यदि काम जल्द शुरू नहीं होता, तो आने वाले महीनों में क्षेत्र में संकट और गहरा सकता है। पेयजल विभाग ने आश्वासन दिया है कि बजट स्वीकृत होते ही कार्य शुरू किया जाएगा।






