
देहरादून: दिव्यांगों के सुरक्षित और सशक्त भविष्य की दिशा में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे दिव्यांग छात्र-छात्राओं को घर बैठे सिविल सेवा की निशुल्क तैयारी कराई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के क्रियान्वयन के लिए समाज कल्याण विभाग को नोडल बनाया गया है और वित्तीय स्वीकृति मिलते ही प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह प्रशिक्षण उन दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए होगा, जो वर्तमान में शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं। योजना के तहत लोकोमोटर (चलने-फिरने में असमर्थ), मूकबधिर और श्रवणबाधित तीन श्रेणियों के दिव्यांग अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा। पाठ्यक्रम को उनकी सहूलियत के अनुसार तैयार किया जाएगा, ताकि पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न आए।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान के बीच सिविल सेवा प्रशिक्षण को लेकर अनुबंध किया गया है। एनआईईपीवीडी की ओर से 19.75 लाख रुपये की धनराशि का प्रस्ताव समाज कल्याण विभाग को भेजा गया है, जिसे वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन को अग्रसारित किया गया है।
समाज कल्याण निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि स्वीकृति मिलते ही प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
दिव्यांग छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों का कहना है कि यह पहल लंबे समय से महसूस की जा रही जरूरत को पूरा करेगी। उनका मानना है कि घर बैठे निशुल्क प्रशिक्षण मिलने से आर्थिक और शारीरिक बाधाएं काफी हद तक कम होंगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान होगी।
आंकड़े और तथ्य
प्रशिक्षण की अवधि छह माह होगी और यह पूरी तरह निशुल्क रहेगा। पाठ्यक्रम तीन माध्यमों—सामान्य किताबें, ब्रेल लिपि और साइन लैंग्वेज—में उपलब्ध कराया जाएगा। पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को विशेष लिंक और आईडी उपलब्ध कराई जाएगी तथा अध्ययन का पूरा शेड्यूल तैयार किया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए कुशल शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी।
आगे क्या होगा
समाज कल्याण विभाग को अब तक 16 दिव्यांग छात्र-छात्राओं के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। अधिक से अधिक अभ्यर्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार शुरू किया जा रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशिक्षण के दौरान सिविल सेवा सहित अन्य शीर्ष पदों पर कार्यरत अधिकारी भी समय-समय पर गेस्ट लेक्चर देकर अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।





