
देहरादून: नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर उपनल कर्मचारियों का धरना सातवें दिन भी जारी रहा। इस बीच रविवार को धरने से जुड़ी एक दुखद खबर सामने आई, जब जिला निर्वाचन कार्यालय में कार्यरत कनिष्ठ सहायक नीलम डोभाल की आंदोलन स्थल के लिए निकलते समय अचानक मौत हो गई। इस घटनाक्रम ने आंदोलनरत कर्मचारियों में शोक और आक्रोश दोनों को बढ़ा दिया है।
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पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य स्थापना दिवस के एक दिन बाद 9 नवंबर से प्रदेशभर के उपनल कर्मचारी देहरादून में नियमितीकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। यह आंदोलन लगातार कठिन परिस्थितियों में जारी है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों से समर्थन भी मिल रहा है। इसी दौरान हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज किए जाने से मामला और अधिक गंभीर हो गया है। हाईकोर्ट पहले ही इन कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नियमावली बनाने के निर्देश दे चुका है।
घटना का विवरण
रविवार सुबह उपनल कर्मचारी नीलम डोभाल आंदोलन स्थल के लिए घर से निकल रही थीं, तभी उनकी अचानक मौत हो गई। धटना स्थल पर मौत नहीं हुई, लेकिन उनके निधन की सूचना मिलते ही आंदोलन स्थल पर शोक का माहौल फैल गया। संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद डोभाल ने बताया कि नीलम और उनके पति दोनों उपनल कर्मचारी हैं और बीते कई दिनों से नियमितीकरण आंदोलन में शामिल थे।
उन्होंने दावा किया कि लगातार मानसिक दबाव और अनिश्चितता ने नीलम को डिप्रेशन में ला दिया था। हालांकि, उनकी मृत्यु का वास्तविक कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों ने इसे सरकार की संवेदनहीनता का परिणाम बताया है।
संगठनों और सहकर्मियों की प्रतिक्रिया
उपनल महासंघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष महेश भट्ट ने कहा कि यह आंदोलन के लिए बेहद दुखद दिन है। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही और संवेदना की कमी के कारण कर्मचारियों को सात दिनों से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों ने नीलम डोभाल को श्रद्धांजलि दी और घोषणा की कि उनके असमय निधन से आंदोलन की आवाज और मजबूत होगी।
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि वे अब किसी भी आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे और ठोस निर्णय आने तक आंदोलन जारी रहेगा। उनके मुताबिक, लगातार मिल रहे समर्थन से आंदोलन को नई ऊर्जा मिल रही है।
कानूनी पृष्ठभूमि और प्रशासनिक स्थिति
उपनल कर्मचारियों की मांग लंबे समय से चल रही है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नियमितीकरण की दिशा में नियमावली बनाने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक इस दिशा में प्रगति नहीं हो सकी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है, जिसके बाद दबाव और बढ़ गया है। उपनल कर्मचारी हाईकोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर कर चुके हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि अब राज्य सरकार को तुरंत ठोस निर्णय लेना चाहिए, अन्यथा आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।







