
देहरादून और दिल्ली में बिल्डरों और शराब कारोबारियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की चार दिन चली छापेमारी शनिवार देर रात समाप्त हो गई। विभाग की टीमें बड़ी संख्या में दस्तावेज और डिजिटल उपकरण कब्जे में लेकर वापस लौटीं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने मंगलवार सुबह देहरादून के कई प्रमुख बिल्डरों और शराब कारोबारियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की थी। यह कार्रवाई रियल एस्टेट और शराब कारोबार से जुड़े संभावित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर की गई थी।
छापेमारी कहाँ-कहाँ हुई?
जांच देहरादून में 16 और दिल्ली में 4 स्थानों पर की गई। जिन प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, उनमें राकेश बत्ता, रमेश बत्ता, विजेंद्र पुंडीर, इंदर खत्री, कमल अरोड़ा और प्रदीप वालिया के आवास व कार्यालय शामिल रहे। उनके दो अकाउंटेंटों से भी पूछताछ हुई।
रमेश बत्ता का छिपा कार्यालय मिला
अधिकांश टीम शुक्रवार रात तक लौट चुकी थीं, लेकिन बिल्डर राकेश बत्ता और रमेश बत्ता के परिसरों पर जांच शनिवार तक जारी रही। वजह यह थी कि विभाग को बल्लूपुर चौक के पास रमेश बत्ता का एक अघोषित कार्यालय मिला, जिसकी जानकारी पूर्व में किसी भी एजेंसी के पास नहीं थी। इस स्थान से भी महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिए गए।
जब्त संपत्ति: नकदी, सोना और बुलियन
चार दिन की जांच में आयकर विभाग ने
- 3 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी,
- लगभग 7 करोड़ रुपये के आभूषण और बुलियन
जब्त किए हैं। मौके पर संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर विभाग ने यह संपत्ति कब्जे में ले ली। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित कारोबारी आगे अपनी बात रखने का अवसर पाएंगे।
डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच
छापेमारी के दौरान विभाग ने लैपटॉप, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, टैब जैसे कई डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं। अब इनकी फोरेंसिक जांच होगी। डिलीट किए गए डेटा को रिकवर कर वित्तीय लेन-देन और अन्य गतिविधियों की गहन जांच होगी।
22 बैंक लॉकर भी जांच के घेरे में
आयकर विभाग को जांच के दौरान कुल 22 बैंक लॉकरों की जानकारी मिली है। विभाग इन्हें खोलकर दस्तावेजों और संपत्तियों की जांच करेगा। इन्हीं विवरणों के आधार पर कर चोरी का अंतिम आंकड़ा तय होगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून में छापेमारी के दौरान कई इलाकों में हलचल रही। कुछ स्थानीय निवासियों का कहना था कि बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर ऐसी कार्रवाई से कर प्रणाली को लेकर पारदर्शिता बढ़ती है।
आगे क्या?
विभाग अब कब्जे में लिए गए दस्तावेजों और डिजिटल डेटा का विश्लेषण करेगा। सभी बरामद लॉकरों और संपत्तियों की जांच के बाद वास्तविक कर चोरी का आंकड़ा निर्धारित किया जाएगा। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं।





