
देहरादून: देहरादून जनपद में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिले के 79 जर्जर और निष्प्रोज्य स्कूल भवनों को एक झटके में ध्वस्त किया जाएगा। लंबे समय से खतरनाक स्थिति में संचालित हो रहे इन विद्यालय भवनों को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने कड़ा रुख अपनाते हुए सात दिन के भीतर रिपोर्ट तैयार कर ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही बच्चों के पठन-पाठन की वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून जिले में वर्षों से कई विद्यालय भवन जर्जर अवस्था में थे, जहां बच्चों की पढ़ाई सुरक्षा जोखिम के बीच चल रही थी। इस पर पहली बार प्रशासन ने ठोस और समयबद्ध कार्रवाई शुरू की है। जिलाधिकारी की सख्ती के बाद महज 10 दिनों में 100 स्कूलों के जर्जर भवनों की रिपोर्ट सामने आई, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने पूरी सूची जिला प्रशासन को सौंप दी।
आधिकारिक जानकारी
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि नौनिहालों की जान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में जर्जर एवं निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों की पहचान, आकलन और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
ध्वस्तीकरण और सुरक्षा उपायों के लिए लोक निर्माण विभाग को एस्टिमेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, ताकि प्रक्रिया में कोई विलंब न हो।
जिले के विद्यालयों की स्थिति
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 79 विद्यालयों के भवन पूरी तरह निष्प्रोज्य पाए गए हैं, जिनमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें से 63 विद्यालयों में शिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही कर दी गई है। शेष 16 विद्यालयों के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा 17 विद्यालय आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किए गए हैं, जबकि 8 विद्यालयों में ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं पाई गई है।
प्रशासन की कार्रवाई
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जो विद्यालय भवन पूरी तरह निष्प्रोज्य हैं, उनमें तत्काल ध्वस्तीकरण किया जाएगा। जहां वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था अभी नहीं है, वहां पहले व्यवस्था सुनिश्चित कर उसके बाद भवन गिराए जाएंगे। आंशिक निष्प्रोज्य भवनों में सुरक्षा मानकों के अनुसार आवश्यक मरम्मत और प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।
आगे क्या होगा
प्रशासन ने दो टूक कहा है कि किसी भी विद्यालय में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण संचालित नहीं होगा। पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेही के साथ पूरा किया जाएगा। जिला प्रशासन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।







