
देहरादून: देहरादून एयरपोर्ट विस्तार से प्रभावित लोगों ने जौलीग्रांट स्थित टीएचडीसी गेस्ट हाउस में आयोजित भूमि अधिग्रहण अधिकारियों की बैठक का बहिष्कार करते हुए जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रभावितों का आरोप है कि बैठक में पहुंचे अधिकारी बिना किसी ठोस तैयारी के आए थे और जमीन के बदले जमीन दिए जाने जैसे अहम मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। इससे नाराज प्रभावितों ने बैठक बीच में ही छोड़ दी, जिससे प्रशासन, युकाडा और प्रभावितों के बीच यह बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून एयरपोर्ट विस्तार परियोजना से प्रभावित ग्रामीण लंबे समय से जमीन के बदले जमीन की मांग कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर प्रभावितों ने करीब 50 दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया था। शासन-प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था। इसी क्रम में प्रभावित यह उम्मीद लेकर बैठक में पहुंचे थे कि उन्हें अपनी प्रमुख मांग को लेकर ठोस जानकारी मिलेगी।
आधिकारिक जानकारी
बैठक टीएचडीसी गेस्ट हाउस में आयोजित की गई थी, जहां भूमि अधिग्रहण से जुड़े अधिकारी मौजूद थे। प्रभावितों के अनुसार, जब अधिकारियों से पूछा गया कि जमीन के बदले जमीन कहां और कैसे दी जाएगी, तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है और अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
संघर्ष समिति के अध्यक्ष मंजीत सजवाण ने कहा कि प्रभावितों ने बैठक में साफ तौर पर पूछा कि उन्हें जमीन के बदले जमीन कहां दी जाएगी, लेकिन अधिकारी एक-दूसरे का मुंह देखते रह गए। इससे प्रभावितों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया।
वहीं समिति से जुड़े विपुल सजवाण ने कहा कि जमीन के बदले जमीन प्रभावितों की सबसे प्रमुख मांग है और जब तक इसे स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे।
आंकड़े / विवरण
प्रभावितों के अनुसार, आंदोलन के दौरान करीब 50 दिनों तक धरना-प्रदर्शन चला था। बैठक में बड़ी संख्या में प्रभावित लोग पहुंचे थे, लेकिन अधिकारियों के संतोषजनक जवाब न देने के कारण बैठक बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई।
आगे क्या होगा
प्रभावितों ने साफ कर दिया है कि जमीन के बदले जमीन की मांग पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इस मुद्दे पर क्या ठोस निर्णय लेती हैं और क्या जल्द ही कोई नई बैठक बुलाकर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया जाता है।







