
रामनगर: उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में दीपावली पर्व से पहले वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू किया है। शुक्रवार को प्रशासन की टीम ने रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डे, और आसपास की झुग्गी बस्तियों में स्नीफर डॉग्स और मेटल डिटेक्टर मशीनों की मदद से सघन जांच की। इस अभियान का मकसद वन्यजीव तस्करी, विशेष रूप से उल्लू तस्करी, को रोकना और जंगलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अभियान का विवरण
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की बिजरानी रेंज के एसडीओ अमित ग्वासाकोटी ने बताया कि दीपावली के दौरान कुछ असामाजिक तत्व उल्लुओं के अवैध शिकार और तंत्र-मंत्र के लिए व्यापार की कोशिश करते हैं। इसे रोकने के लिए यह विशेष अभियान चलाया गया। जांच के दौरान दर्जनों वनकर्मियों ने हर आने-जाने वाले व्यक्ति और उनके सामान पर नजर रखी। सिंपल टॉक्स और लाई डिटेक्टर मशीनों का उपयोग कर संभावित खतरों की पहचान की गई।
टीम ने रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, और शहर के बाहरी इलाकों में संदिग्ध लोगों की गतिविधियों की जांच की। अभियान में किसी भी अवैध गतिविधि या वन्यजीव तस्करी से संबंधित कोई ठोस सबूत नहीं मिला, लेकिन निगरानी को और सख्त कर दिया गया है।
दीपावली और वन्यजीव तस्करी का खतरा
एसडीओ अमित ग्वासाकोटी ने बताया, “दीपावली के समय उल्लुओं की तस्करी का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि कुछ लोग इन्हें तंत्र-मंत्र के लिए इस्तेमाल करते हैं। हमारी टीमें इस पर कड़ी नजर रख रही हैं।” 2024 की एक वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में पिछले तीन साल में उल्लू तस्करी के 15 मामले सामने आए हैं। इस अभियान का उद्देश्य न केवल उल्लुओं की सुरक्षा करना है, बल्कि बाघ, हाथी, और अन्य वन्यजीवों की रक्षा भी सुनिश्चित करना है।
पर्यटन सीजन और बढ़ी सुरक्षा
कॉर्बेट नेशनल पार्क में अक्टूबर से पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है, जिसके चलते देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक रामनगर पहुंच रहे हैं। 2024 में 5 लाख से अधिक पर्यटक पार्क में आए थे, और इस साल यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इस दौरान सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत किया गया है। कॉर्बेट प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, शिकार, या वन्यजीव तस्करी की जानकारी तुरंत वन विभाग या पुलिस को दें।
एसडीओ ग्वासाकोटी ने कहा, “हमारी टीमें दिन-रात गश्त कर रही हैं। दीपावली तक यह अभियान और तेज होगा।” प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होगा।
स्थानीय सहयोग और जागरूकता
स्थानीय निवासी राकेश मेहरा ने कहा, “कॉर्बेट हमारी पहचान है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की यह कार्रवाई स्वागत योग्य है। हम भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे।” प्रशासन ने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है, जिसमें स्कूलों और गांवों में लोगों को वन्यजीव संरक्षण का महत्व समझाया जा रहा है।







