
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन और उद्योग विभागों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के जरिए योजनाओं की पूरी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि पात्र व्यक्ति समय पर उनका लाभ उठा सकें और आवंटित बजट का ठोस परिणाम जमीन पर दिखाई दे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य सरकार द्वारा संचालित कृषि, बागवानी, पर्यटन और स्वरोजगार योजनाएं प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ मानी जाती हैं। इन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें की जा रही हैं।
आधिकारिक जानकारी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने और उन्हें स्वरोजगार के अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर और पूरा लाभ मिलना चाहिए। साथ ही उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त को अनिवार्य रूप से उन्नति पोर्टल पर अपलोड करने और बजट के पूर्ण आउटकम पर विशेष फोकस रखने को कहा।
सेब, कीवी और बागवानी योजनाएं
सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर तय लक्ष्यों को समय से पूरा किया जाए। किसानों को अधिक प्रोत्साहन देने, उनके देयकों का समय पर भुगतान करने और उत्पाद का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तेज़ी से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
हनी मिशन और जैविक उत्पादन
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में शहद उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। हनी मिशन के तहत शहद उत्पादन को और प्रभावी बनाने के साथ ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए। बागवानी और मौन पालन में बेहतर कार्य करने वाले राज्यों के अध्ययन के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीमें भेजने के निर्देश भी दिए गए।
जीआई टैग और मिलेट नीति
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 29 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से जुड़े हैं। वर्ष 2026 में 25 अन्य उत्पादों को जीआई टैग के लिए चिन्हित किया जाएगा।
134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के तहत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चीनी को शामिल किया गया है। पहले चरण में 30 हजार हेक्टेयर और दूसरे चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल को कवर किया गया है। अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट की खरीद हो चुकी है, जबकि लक्ष्य 5 हजार मीट्रिक टन था।
स्वरोजगार और पर्यटन योजनाएं
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और स्वरोजगार योजना 2.0 के तहत चार वर्षों में 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार लोगों को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।
पर्यटन विभाग की दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिनके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण हुआ है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 1,000 से अधिक लोगों को 105 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि योजनाओं की निरंतर समीक्षा की जाए और उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। सरकार का फोकस कृषि, पर्यटन और स्वरोजगार के जरिए राज्य में स्थायी रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर रहेगा।







