
देहरादून: टीकाकरण कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने बड़ा कदम उठाया है। अब हर बच्चे की टीकाकरण से जुड़ी अलग डिजिटल आईडी तैयार की जाएगी, जिससे यह पता चल सकेगा कि बच्चे को कब और कौन-कौन से टीके लगाए गए हैं। इसके लिए डिजी लॉकर को यू-विन पोर्टल से एकीकृत किया जाएगा। इस व्यवस्था से टीकाकरण रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और देश के किसी भी हिस्से में बच्चे के टीकों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन समय-समय पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण कार्यक्रम चलाता है। अब तक इन कार्यक्रमों की जानकारी अलग-अलग स्तरों पर दर्ज की जाती थी, जिससे कई बार रिकॉर्ड की उपलब्धता और सत्यापन में दिक्कतें आती थीं। डिजिटल आईडी और पोर्टल एकीकरण से इस प्रक्रिया को सरल और विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
यू-विन पोर्टल की भूमिका
यू-विन पोर्टल का उद्देश्य सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण को डिजिटाइज करना है। इसके माध्यम से टीकाकरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है, क्यूआर कोड आधारित डिजिटल प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं और अगली खुराक के लिए एसएमएस अलर्ट भेजे जाते हैं। इससे टीकाकरण प्रक्रिया आसान होने के साथ-साथ देशभर में कहीं भी सुलभ हो सकेगी।
आधिकारिक जानकारी
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने एनएचएम के साथ हुई बैठक में निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे के टीकाकरण की जानकारी के लिए उनकी डिजिटल आईडी तैयार की जाए और इसके लिए डिजी लॉकर को यू-विन पोर्टल से जोड़ा जाए।
निदेशक एनएचएम रश्मि पंत ने बताया कि बैठक में मिले निर्देशों के अनुसार संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दे दिए गए हैं।
उच्च हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों के बच्चों को हेली सेवा
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी के लिए चिह्नित बच्चों को लाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह सेवा उच्च हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों के उन बच्चों के लिए होगी, जो जन्मजात असामान्यताओं जैसे होंठ या तालु का फटना, हृदय संबंधी दोष, क्लबफुट और न्यूरल ट्यूब दोष जैसी समस्याओं से ग्रस्त हैं।
टीबी स्क्रीनिंग और अन्य स्वास्थ्य निर्देश
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत विभाग ने इस वर्ष सितंबर तक 11 लाख संवेदनशील व्यक्तियों की टीबी स्क्रीनिंग का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के क्रय की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके साथ ही फरवरी माह में एनीमिया पखवाड़ा आयोजित करने, डेंगू नियंत्रण के लिए अन्य राज्यों की कार्ययोजना का अध्ययन करने, ब्रेस्ट स्क्रीनिंग में आधुनिक उपकरणों के उपयोग और कैंसर को अधिसूचित रोग के रूप में शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आगे क्या होगा
डिजी लॉकर और यू-विन के एकीकरण के बाद बच्चों के टीकाकरण का डिजिटल रिकॉर्ड चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इससे टीकाकरण कवरेज बढ़ेगा, फॉलोअप आसान होगा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।





