
चारधाम यात्रा 2025: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2025 अपने समापन की ओर बढ़ रही है, और इस वर्ष तीर्थयात्रियों का आंकड़ा 50 लाख को पार करने की उम्मीद है। 22 अक्टूबर 2025 को गंगोत्री धाम के कपाट विधिवत रूप से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए, और मां गंगा की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव के लिए रवाना होगी। वहीं, 23 अक्टूबर को केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट भी बंद होंगे। इस यात्रा सीजन में अब तक 49.30 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, और यात्रा के अंतिम चरण में प्रतिदिन 10 से 11 हजार तीर्थयात्री धामों में पहुंच रहे हैं।
चारधाम यात्रा का शुभारंभ और समापन
चारधाम यात्रा 2025 का आगाज 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुआ। इसके बाद 2 मई को केदारनाथ और 4 मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा पूर्ण रूप से शुरू हुई। अब, यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर है, और निम्नलिखित तिथियों पर धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद होंगे:
- गंगोत्री धाम: 22 अक्टूबर 2025, सुबह 11:30 बजे (बंद हो चुका)
- केदारनाथ धाम: 23 अक्टूबर 2025, सुबह 8:30 बजे
- यमुनोत्री धाम: 23 अक्टूबर 2025, दोपहर 12:30 बजे
- बदरीनाथ धाम: 25 नवंबर 2025
तीर्थयात्रियों का रिकॉर्ड आंकड़ा
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 21 अप्रैल 2025 तक चारधाम यात्रा में कुल 49.30 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने तक यह आंकड़ा 50 लाख को पार कर जाएगा। इस वर्ष यात्रा में भारी भीड़ देखी गई, जिसमें देश-विदेश से तीर्थयात्री शामिल हुए। अंतिम चरण में भी प्रतिदिन 10,000 से 11,000 श्रद्धालु धामों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
गंगोत्री धाम: शीतकालीन प्रवास
22 अक्टूबर को गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली मुखबा गांव के लिए प्रस्थान करेगी। मुखबा में मां गंगा की पूजा-अर्चना शीतकाल में की जाएगी। मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है, और स्थानीय लोग व तीर्थयात्री शीतकाल में भी दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
यमुनोत्री और केदारनाथ: अंतिम तैयारियां
23 अक्टूबर को भैयादूज के अवसर पर यमुनोत्री धाम में मां यमुना के कपाट दोपहर 12:30 बजे और केदारनाथ धाम में भगवान केदारनाथ के कपाट सुबह 8:30 बजे बंद होंगे। यमुनोत्री की उत्सव मूर्ति खरसाली गांव में शीतकाल के लिए ले जाई जाएगी। दोनों धामों में कपाट बंद होने से पहले भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
पर्यटन और आध्यात्मिक महत्व
चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ तीर्थयात्रियों की संख्या ने राज्य के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। शीतकाल में मुखबा और खरसाली जैसे स्थानों पर दर्शन और बर्फबारी का आनंद पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।







