
चंपावत: हिमालयी राज्य उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तरकाशी में देवदार के हजारों पेड़ों के कटान का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब चंपावत में 1882 पेड़ों के कटान की तैयारी सामने आई है। चंपावत शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित 9.87 किलोमीटर लंबे बाईपास के निर्माण हेतु यह वन कटान किया जाना है। करीब 220.80 करोड़ रुपये की इस परियोजना को यातायात सुधार के लिहाज से अहम बताया जा रहा है, लेकिन इसके बदले बड़ी संख्या में पेड़ों की बलि चिंता बढ़ा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में सड़क, बाईपास और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अक्सर पर्यावरणीय नुकसान के सवालों के साथ सामने आती रही हैं। पहले उत्तरकाशी और अन्य पर्वतीय जिलों में बड़े पैमाने पर पेड़ कटान को लेकर विरोध हो चुका है। अब चंपावत बाईपास परियोजना भी इसी बहस का हिस्सा बनती दिख रही है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिशासी अभियंता दीपक जोशी के अनुसार चंपावत में करीब 9.87 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी कुल लागत लगभग 220.80 करोड़ रुपये है। इस परियोजना में 8.94 हेक्टेयर वन भूमि और 12.78 हेक्टेयर नाप भूमि शामिल है।
उन्होंने बताया कि बाईपास निर्माण से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्किल रेट का चार गुना और शहरी क्षेत्रों में सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक बाईपास निर्माण की सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं।
स्थानीय / मानवीय आवाजें
स्थानीय लोगों का कहना है कि चंपावत में बढ़ते ट्रैफिक के कारण आए दिन जाम की समस्या रहती है और बाईपास से राहत जरूर मिलेगी।
वहीं कुछ ग्रामीणों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान भविष्य में जल, जंगल और जमीन से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है।
आंकड़े / तथ्य
बाईपास की लंबाई 9.87 किलोमीटर प्रस्तावित है। परियोजना की लागत करीब 220.80 करोड़ रुपये आंकी गई है। कुल 1882 पेड़ों को काटने की अनुमति दी जा चुकी है। इनमें देवदार, बांज, चीड़ सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। बाईपास निर्माण में 8.94 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार बाईपास निर्माण के लिए चिन्हित किए गए 1882 पेड़ों का कटान जल्द शुरू किया जाएगा, जिसे वन निगम द्वारा अंजाम दिया जाएगा। इसके बाद सड़क निर्माण का काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा। प्रशासन का दावा है कि बाईपास बनने से चंपावत शहर को जाम से राहत मिलेगी, हालांकि पर्यावरणीय असर को लेकर निगरानी बनाए रखने की बात भी कही जा रही है।






