
ज्योतिर्मठ (चमोली): सीमांत क्षेत्र लांजी–पोखनी में भालुओं के लगातार हमलों से परेशान ग्रामीण अब गुलदार के खतरे का भी सामना कर रहे हैं। गुरुवार सुबह चारा पत्ती लेने गई एक महिला पर गुलदार ने अचानक हमला कर दिया, लेकिन शोर मचाने और कुत्तों के भौंकने से वह बाल-बाल बच गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के ऊँचाई वाले गांवों में मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। चमोली जिले के ज्योतिर्मठ ब्लॉक के लांजी–पोखनी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से भालुओं की सक्रियता बेहद बढ़ गई थी। भालू कई घरों की गौशालाओं पर हमला कर दूध देने वाले पशुओं को मार चुके हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। वन विभाग की गश्त टीमें रात में निगरानी कर रही थीं, लेकिन हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
औपचारिक जानकारी
वन पंचायत सरपंच दिनेश राणा ने बताया कि भालुओं के कारण गांव में पहले ही दहशत का माहौल था। इसी बीच सुबह चारा लेने गई कालपी देवी, रीना, वेदिका और उनके साथ मौजूद बच्चों पर समीप पहाड़ी झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक झपट्टा मारा। महिलाओं के चीखने और पास मौजूद कुत्तों के भौंकने से गुलदार भाग गया, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई।
घटना के बाद गांव की महिलाओं में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के लगातार भरोसों के बावजूद जंगली जानवरों का आतंक कम नहीं हो रहा और लोग हर दिन खतरे में जीने को मजबूर हैं। महिलाओं और बच्चों की आवाजाही कठिन होती जा रही है और कई परिवार अब शाम होते ही घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने कहा कि अब स्थिति असहनीय हो चुकी है। भालू और गुलदार दोनों की सक्रियता ने बच्चों की शिक्षा, खेतों में काम और सामान्य आवाजाही को बेहद प्रभावित कर दिया है। कई ग्रामीणों ने बताया कि बुजुर्ग और छोटे बच्चे घरों में ही कैद हो गए हैं। एक स्थानीय महिला ने कहा कि “हम रोज सुबह और शाम डर के साए में निकलते हैं। अगर शोर न होता तो आज बड़ा हादसा हो सकता था।”
ग्रामीणों का चेतावनी भरा रुख
वन पंचायत सरपंच दिनेश राणा ने स्पष्ट कहा कि यदि वन विभाग और प्रशासन ने जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि विभागीय कार्यालयों में तालाबंदी तक की स्थिति बन सकती है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव के आसपास निगरानी बढ़ाई जाए, वन्यजीवों को सुरक्षित दूरी पर रोका जाए और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत दी जाए।
आगे क्या?
वन विभाग की टीमें फिलहाल गांव के आसपास मौजूद हैं और गुलदार व भालुओं की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अतिरिक्त गश्त और ट्रैकिंग की व्यवस्था बढ़ाई जाएगी। स्थानीय प्रशासन आगामी दिनों में ग्रामीणों के साथ बैठक कर सुरक्षा उपायों पर चर्चा कर सकता है।





