नैनीताल: उत्तराखंड में पत्राचार के माध्यम से बेसिक टीचर सर्टिफिकेट (बीटीसी) प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निदेशक प्रारंभिक शिक्षा के समक्ष प्रत्यावेदन देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया है कि वह कानून के अनुसार याचिकाकर्ताओं के प्रत्यावेदन पर तीन महीने के भीतर उचित निर्णय ले। यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष सुना गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
याचिकाकर्ता प्रतीक सकलानी सहित अन्य अभ्यर्थियों ने पत्राचार के माध्यम से बीटीसी की डिग्री प्राप्त की थी। उनकी मार्कशीट में यह शर्त दर्ज थी कि यह प्रमाणपत्र राज्य के अधीन नियुक्ति के लिए मान्य नहीं होगा। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इसी तरह की योग्यता रखने वाले कई अन्य अभ्यर्थियों को सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया है, जिससे उनके साथ भेदभाव हुआ है।
आधिकारिक जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने याचिकाकर्ताओं के दावे को गलत बताया। सरकार की ओर से कहा गया कि समान स्थिति वाले कुछ उम्मीदवारों को केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए संविदा पर समेकित मानदेय दिया गया था, न कि नियमित नियुक्ति। सरकार ने 27 नवंबर 2006 के शासनादेश का हवाला देते हुए बताया कि इस आदेश की वैधता को पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ भी बरकरार रख चुकी है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि पत्राचार के माध्यम से प्रशिक्षण लेने वाले अभ्यर्थियों को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे मामलों में विभागीय स्तर पर स्पष्ट और एकरूप नीति से ही विवाद समाप्त हो सकता है।
याचिकाकर्ताओं की मांग
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष यह दलील दी कि चूंकि समान योग्यता वाले कुछ लोग अभी भी संविदा के आधार पर सेवा में हैं, इसलिए उनके मुवक्किलों के मामलों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश देने की मांग की कि वे अनुबंध के आधार पर नियुक्ति के अनुरोध पर निर्णय लें। इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोई आपत्ति नहीं जताई।
आगे क्या होगा
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सभी याचिकाओं को एक साथ निस्तारित करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को प्रत्यावेदन देंगे। निदेशक को निर्देश दिया गया है कि वे 90 दिनों के भीतर कानून के अनुसार इस पर फैसला लें।
